प्रश्न - मृदा स्वास्थ्य कार्ड बन रहे हैं, पर तमाम ऐसे कार्ड भी बने हैं जिनमें किसी प्रक्रिया का निर्वहन नहीं किया गया। यहां तक की मिट्टी की जांच तक नहीं की गई।
सरकार ने ग्यारह करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए हैं। हमने बड़े पैमाने पर किसानों के इस मुद्दे का हल निकालने का प्रयास किया है। हो सकता है कि इनमें से कुछेक में ऐसा हुआ हो। हाल ही में किसी ने मुझसे ऐसा ही प्रश्न सरकार द्वारा बनाए गए साढ़े सात करोड़ शौचालयों के मामले में किया था। दुर्भाग्य है कि उन्हें इतने शौचालयों में सिर्फ साढ़े सात हजार या 75,000 ऐसे शौचालय दिखे, जिनका प्रयोग नहीं किया जा रहा है या जिनका सही ढंग से निर्माण नहीं हुआ।
हमें अपने नजरिये को बदलना पड़ेगा। बड़े पैमाने पर इनका उपयोग हो रहा है, जबकि मामूली स्तर पर कमी है। ऐसा नहीं है कि हमें इसकी फिक्र नहीं है, लेकिन सुधार के लिए समय तो चाहिए। मैं ये नहीं कहता कि सौ फीसदी किसानों ने मृदा कार्ड का उपयोग किया होगा। लेकिन जितनों ने भी उपयोग किया, एक सुखद शुरुआत हुई और इसके चलते उर्वरक की मांग देश में 8 से 10 फीसदी घट गई है।
प्रश्न - फसल बीमा किसानों के लिए कितना लाभकारी है? इसकी व्यवस्था में सरकार आगे क्या काम कर रही है?
मौजूदा फसल बीमा पिछले 50 साल में किसानों को लाभान्वित करने के निर्णयों में सबसे महत्वपूर्ण है। पहले भी ऐसा बीमा हुआ करता था, लेकिन भारी प्रीमियम और मुआवजे के मिलने में भारी परेशानी के चलते देश के किसानों का विश्वास इस पर से उठ गया था। अब किसान को महज डेढ़ से दो फीसदी भुगतान कर एक समुचित कवरेज मिलता है। पहले किसान की फसल के कुछ अंश ही सुरक्षित हुआ करते थे। अब बीजरोपण से फसल के मंडी में पहुंचाने तक बीमा सुरक्षा मिलती है। हमने कुछ पायलट किए हैं, जिसमें मशीन और मोटरसाइकिल की सुरक्षा को भी जोड़ा है। देश के पांच करोड़ किसान कहीं ना कहीं इसके जरिए लाभान्वित हुए हैं। हम इस व्यवस्था को मानव आश्रित की जगह तकनीक के जरिए फसल बीमा मुहैया कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हम सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए इस व्यवस्था को जल्द चाक-चौबंद करेंगे।
प्रश्न - देशी जानवरों की नस्ल को बढ़ाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
- सरकार जानवरों की देशी नस्लों खासतौर पर गायों के लिए गोकुल अभियान के तहत विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। सरकार ने 20 जगह लैबोरेटरी स्थापित की हैं और उन निजी लैब के खिलाफ कदम उठाए हैं, जो विदेशी नस्ल को बढ़ाने के लिए काम करते थे। इस मामले में हमारा इरादा स्पष्ट है जिस पर हम आगे बढ़ रहे हैं।
प्रश्न-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में करने पर सरकार काम कर रही है। सरकार का क्या आकलन है और किसानों को क्या लाभ होगा?
यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि कृषि क्षेत्र की परेशानियों का हल तकनीक के जरिए निकाला जाए। उनमें से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। कई विकसित देशों ने कृषि को इस तकनीक के साथ जोड़ा है। कितना उत्पादन होगा, कितनी देश की मांग है और उसके अतिरिक्त उत्पादन को कहां खपाया जाए या दूसरी कमोडिटी में स्थानांतरित किया जाए। दुर्भाग्य से देश की कई राज्य सरकारों ने भूमि सुधार कानून को लागू नहीं किया है। इस कारण उनके पास डिजिटलाइज लैंड रिकार्ड नहीं है। केंद्र ने इसके लिए राज्यों से कई बार कहा और आर्थिक सहायता भी दी। लेकिन अब तक उन्होंने कदम नहीं उठाया। हमें आज ढांचागत मजबूती की जरूरत है। चूंकि कृषि और भूमि राजस्व भी राज्य का विषय है। हम प्रदेशों से लगातार आग्रह कर रहे हैं कि वो केंद्र द्वारा कृषि पर सुझाए गए उपायों पर आगे बढ़ें।