मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यन ने सोमवार को कहा कि भारत की आर्थिक सुस्ती ढांचागत के बजाय चक्रीय ज्यादा है और सरकार अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए पूरी तैयारी के साथ सुधार के एजेंडे पर काम कर रही है। उन्होंने फिक्की यंग लीडर्स समिट के दौरान ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा, ‘मौजूदा सुस्ती चक्रीय है और सरकार की तरफ से किए जा रहे कॉरपोरेट कर जैसे उपायों का उद्देश्य देश में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करना है, जो टिकाऊ विकास के लिए जरूरी है।’ उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के लिए निजी निवेश और खपत का बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘इन उपायों को लागू करने के पीछे सरकार का सोचा-समझा एजेंडा है और इनके नतीजे जल्द ही दिखने लगेंगे।’
सुब्रमण्यन ने माना कि अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसकी प्रकृति का आकलन अर्थव्यवस्था की संभावित विकास दर के अनुमान के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यदि कुछ ढांचागत पहलुओं के कारण विकास की संभावनाओं में बदलाव हुआ है तो आप कह सकते हैं कि यह ढांचागत है।’
विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती के चलते जुलाई-सितंबर में भारत की जीडीपी विकास 4.5 फीसदी के स्तर पर आ गई थी। इससे पहले अप्रैल-जून में यह 5 फीसदी और जुलाई-सिंतबर, 2018 तिमाही में 7 फीसदी रही थी। सितंबर महीने में सरकार ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए कॉरपोरेट कर 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी कर दिया था।