अर्थव्यवस्था की रफ्तार में वित्त वर्ष 2018-19 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में आई सुस्ती आम चुनाव संबंधी अनिश्चितताओं के कारण अभी जारी रहेगी। औद्योगिक उत्पादन की धीमी गति से भी अर्थव्यवस्था की विकास दर सुस्त रहेगी। डन एंड ब्रैडस्ट्रीट (डीएंडबी) की ओर से अर्थव्यवस्था पर जारी की गई ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोग के लिए मांग के कमजोर रहने और चुनाव संबंधी अनिश्चितता से देश के औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। डीएंडबी का अनुमान है कि मार्च, 2019 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) एक से डेढ़ फीसदी कम रहेगा। उसका अनुमान है कि इस दौरान सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) महंगाई 2.7 से 2.9 फीसदी और डब्ल्यूपीआई (थोक मूल्य सूचकांक) महंगाई 2.8 से 3.0 फीसदी के बीच रहेगी।
सुस्ती के लिए अन्य घरेलू मुद्दे भी जिम्मेदार
डीएंडबी के प्रमुख अर्थशास्त्री अरुण सिंह का कहना है, ‘यह बात परेशान करने वाली है कि बीते वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में जो सुस्ती देखने को मिली थी, वह वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकेतकों और विभिन्न घरेलू मुद्दों के कारण अभी जारी रहेगी। महंगाई का नीचे आना कमजोर मांग का एक संकेत है। वर्तमान में चुनाव संबंधी अनिश्चितता से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।’
रणनीतिक क्षेत्रों के मुद्दे सुलझाना जरूरी
डीएंडबी के प्रमुख अर्थशास्त्री ने कहा कि घरेलू मांग में तेजी लाने और विमानन, बिजली, बैंकिंग एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के मुद्दों को सुलझाना आवश्यक है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमा करने से जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही व्यापार को दरकिनार करना भी मुश्किल हो जाता है।
खुदरा महंगाई पर दोतरफा असर
रिपोर्ट में कीमत के मोर्चे पर कहा गया है कि कुछ खाद्य वस्तुओं की दरों में उलटफेर हुआ है। मुख्य महंगाई के तहत कुछ मोर्चे पर इसे नियंत्रित करने से समग्र महंगाई कम रहने का अनुमान है। हालांकि, तेल की बढ़ती कीमतों से कृषि क्षेत्र प्रभावित होगा। इसके अलावा अल-नीनो परिस्थितियों के मजबूत होने के कारण जून और जुलाई में मानसून पर असर पड़ेगा, जिससे बारिश प्रभावित हो सकती है। दोनों महीनों में खरीफ फसल की बुवाई होती है। इन दोनों कारकों की वजह से गैर-प्रमुख मोर्च पर महंगाई का दबाव बढ़ेगा, जिससे खुदरा महंगाई पर दोतरफा असर पड़ सकता है।