सौर पैनल व इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं की बढ़ती मांग के कारण कैलेंडर वर्ष 2024 में देश का चांदी आयात बढ़कर दोगुना हो सकता है। एक बड़े आयातक आम्रपाली समूह के सीईओ चिराग ठक्कर ने शुक्रवार को कहा, औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी के कारण इस वर्ष चांदी का आयात 6,500 से 7,000 टन तक पहुंच सकता है। 2023 के दौरान कुल 3,625 टन चांदी का आयात किया गया था।
इंडिया गोल्ड कान्फ्रेंस से अलग बातचीत में ठक्कर ने कहा, दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ता भारत के अधिक आयात से वैश्विक कीमतों को समर्थन मिल सकता है। वैश्विक स्तर पर इस चांदी की कीमतें अपने एक दशक के उच्चतम स्तर के करीब हैं। उन्होंने कहा, आभूषणों की पारंपरिक मांग बनी हुई है। 2024-25 के बजट में सीमा शुल्क को 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी करने के बाद चांदी का मूल्य काफी किफायती हो गया है। उधर, वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 की पहली छमाही में चांदी का आयात बढ़कर 4,554 टन के स्तर पर पहुंच गया है। एक साल पहले की समान अवधि में आयात 560 टन रहा था।
निवेश के लिए भी चांदी की भारी मांग
ठक्कर ने कहा, सोने के मुकाबले ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में भी निवेश के लिए लोगों में चांदी की भारी मांग देखने को मिल रही है। चालू कैलेंडर वर्ष 2024 की पहली छमाही के दौरान निवेश मांग अभूतपूर्व रही है।घरेलू बाजार में चांदी का वायदा भाव मई में बढ़कर 96,493 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया। चांदी ने इस साल अब तक निवेशकों को करीब 14 फीसदी का रिटर्न दिया है, जबकि सोने में निवेश करने पर इस दौरान 13 फीसदी का मुनाफा हुआ है।