सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन (Bureau of Civil Aviation Security's, BCAS) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई से करने से मना कर दिया। बता दें कि पिछले दिनों बीसीएएस ने घरेलू उड़ानों के सिखों को कृपाण रखने की अनुमति दी थी। उसके इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू सेना की इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने की सलाह दी है।
हिंदू सेना ने याचिका में खतरे का जताया था अंदेशा
हिंदू सेना ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि बीसीएएस का यह फैसला घरेलू उड़ानों के दौरान खतरा पैदा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अब्दुल नजीर और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि बीते चार मार्च को बीसीएएस ने सिखों के हवाई उड़ानों के दौरान किसी भी हवाई अड्डे पर कृपाण लाने पर रोक लगा दी थी। उसके बाद नौ मार्च को एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले को बदलने की मांग की थी। इस पत्र में बीसीएस के चार मार्च के फैसले को सिख अधिकारों पर हमला बताया गया था। उसके बाद 12 मार्च को बीसीएएस ने एक शुद्धि पत्र जारी कर अपना ये फैसला वापस ले लिया। आगे चलकर इस मामले में हिंदू सेना ने ये फैसला बदलने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।