हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स में 750 अंकों की गिरावट आने के कारण दलाल स्ट्रीट के निवेशकों की संपत्ति सोमवार को 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गई। पिछले शुक्रवार को मिली बढ़त को बाजार के बुल संभालकर रख पाने में असपुल रहे। सोमवार को निफ्टी भी लुढ़ककर 16,900 के स्तर पर पहुंच गया। 30 शेयरों का सेंसेक्स इंडेक्स सोमवार को 638.11 अंकों की गिरावट के साथ 56,788 अंकों पर बंद हुआ। वहीं, इसका व्यापक स्वरूप निफ्टी 207 अंक टूटकर 16,887 अंकों के लेवल पर बंद हुआ।
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार पर इन चार कारणों से दबाव दिखा।
1. ग्लोबल मार्केट का कमजोर रुख
वैश्विक बाजारों में जारी मंदी का असर सोमवार को भारतीय बाजार पर भी दिखा। यूराेप का STOXX 600 इंडेक्स में इस दौरान 1.4% की गिरावट दर्ज की गई। लंदन का FTSE-100 इंडेक्स भी दूसरे बाजारों राह पर चलते हुए लगभग 1% तक टूटा। एशियाई शेयरों में भी नकारात्मक रुझान नजर आया। सिर्फ जापान का बाजार हरे निशान पर दिखा जहां ऊर्जा और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर मजबूत होने से बाजार को सपोर्ट मिला।
2. क्रेडिट सुइस में व्याप्त क्राइसिस
स्विस बैंकिंग के दिग्गज क्रेडिट सुइस की 27 अक्टूबर को प्रस्तावित पुनर्गठन योजना से जुड़ी में अफवाहों के कारण भी सोमवार को भारतीय बाजार कमजोर हुआ। क्रेडिट सुइस में बैंक के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (सीडीएस) में तेज वृद्धि दिखी है। सीडीएस कंपनी को लोन डिफॉल्ट करने वालों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि, बैंक का प्रबंधन बड़े ग्राहकों और निवेशकों को अपनी तरलता और पूंजी के बारे में आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है। फिर भी यूरोपीय बाजारों में सोमवार को इसके शेयर 10% तक टूट गए।
3. क्रूड ऑयल की कीमतों में इजाफा
क्रूड ऑयल की कीमतों में चार प्रतिशत का इजाफा हुआ है। ओपीईसी की ओर से कहा गया है कि वह उत्पादन में प्रतिदिन एक बिलियन बैरेल की कटौती करने पर विचार कर रहा है। वे ऐसा क्रूड ऑयल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट के बाद भाव को स्थिर रखने के लिए कर सकते हैं। बता दें कि कोरोना संकट के बाद तेल उत्पादन में यह अब तक की सबसे बड़ी कटौती होगी।
4. रुपये पर बढ़ता दबाव
भारतीय रुपया दबाव में है क्योंकि घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.67% कम होकर 81.89 पर कारोबार कर रहा है। हालांकि रुपये में गिरावट निर्यातकों के लिए सकारात्मक है, लेकिन इससे हमारा आयात महंगा हो रहा है। 21 सितंबर को यूएस फेड की 75 बीपीएस दर में बढ़ोतरी के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक या एफआईआई भारतीय इक्विटी बाजार में नेट सेल रहे हैं। शुक्रवार को एफआईआई ने बाजार में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी शेयरों की बिकवाली की थी। एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने एफआईआई भारतीय बाजार में 7,624 करोड़ रुपये के शुद्ध विक्रेता थे।