भारत अपनी उच्च तेल परिशोधन क्षमता के बूते तैयार पेट्रोलियम उत्पाद का बड़ा निर्यातक देश बन कर उभर रहा है। निर्यात गंतव्य देशों की सूची में स्पेन, फ्रांस के बाद अब मॉरीशस भी जुड़ गया है। इटली, तंजानिया, जार्डन जैसे देशों ने भी आयात बढ़ा दिया है। भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा आपूर्ति में उथल-पुथल के बीच भारतीय रिफाइनरियों की तकनीकी व शोधन क्षमता दुनिया भर में सराही जाती है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता विस्तार में भारत की प्रमुख हिस्सेदारी होगी। भारत की रणनीति है कि तमाम देशों से प्रतिस्पर्धी कीमत पर कच्चा तेल लेकर उससे पेट्रोलियम उत्पाद तैयार कर निर्यात किया जाए ताकि नए बाजारों में अपनी पकड़ बढ़ाई जा सके।
भारत को मिल रहे नए निर्यात बाजार
हाल में भारत और मॉरीशस के बीच पांच साल का ईंधन आपूर्ति समझौता हुआ है। इसके तहत भारत मॉरीशस को पेट्रोल, हाई-स्पीड डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल निर्यात करेंगी। भारत पहले से ही श्रीलंंका, नेपाल और भूटान की पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है।
अफ्रीका के कई अन्य देश भी भारत से आयात कर रहे
भारत अमेरिकी दबाव को नजरंदाज कर रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है, वहीं अब यूक्रेन युद्ध के चलते ऐसी स्थिति हो गई कि रूस को खुद भारत से तैयार ईंधन मंगाना पड़ रहा है। सिंगापुर, जार्डन, श्रीलंका, नीदरलैंड, यूएई, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, तंजानिया और पूर्वी-पश्चिमी अफ्रीका के कई अन्य देश भी भारत से आयात कर रहे हैं। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में पिछले साल जुलाई के मुकाबले इस साल जुलाई में 67.64% की बढ़ोतरी हुई है। ईरान युद्ध के दौरान इसमें 42.64% की बढ़ोतरी हुई।