आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार में उसी दिन शेयरों की खरीद-फरोख्त का निपटान किया जा सकता है, जिस दिन निवेशकों ने सौदे का ऑर्डर दिया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि वह खुदरा निवेशकों की मदद के लिए इस तरह के विकल्प की तलाश कर रहा है। हालांकि, यह तभी होगा, जब बाजार के प्रतिभागियों को इस योजना पर कोई आपत्ति न हो।
सेबी ने सोमवार को कहा, जनवरी में एक दिन में निपटान की व्यवस्था लाई गई थी। अब अक्तूबर, 2024 से खरीद-फरोख्त का निपटान उसी दिन होगा, जिस दिन निवेशक ने इसका ऑर्डर दिया है। ऑफशोर निवेशक भी तत्काल निपटान पर जोर दे रहे हैं।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने कहा कि नियामक इस बात को लेकर सचेत है कि नई निपटान योजना की शुरूआत से बाजार की तरलता में कोई दिक्कत नहीं हो। नारायण ने कहा, तत्काल निपटान से पहले हमें सभी तरह की चिंताओं और तरीकों को देखना होगा। अगर गंभीर आपत्तियां हैं, तो हम ऐसा नहीं करेंगे।
जेरोधा प्लेटफॉर्म पर तकनीकी दिक्कत निवेशक परेशान
स्टॉक ब्रोकिंग जेरोधा का ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म फिर तकनीकी दिक्कत में आ गया है। सोमवार की सुबह से ही निवेशकों को ऑर्डर में समस्या आ रही थी। निवेशकों ने कहा, ऑर्डर नहीं देख पा रहे हैं और न ही वे पूरा हो पा रहे हैं। गड़बड़ी के कारण ट्रेडर्स पोजीशन से बाहर नहीं निकल पा रहे, जिससे उनको नुकसान हुआ है। पिछले महीने ही जेरोधा को पीछे छोड़कर ग्रो स्टॉक ब्रोकिंग में पहले स्थान पर आ गया था।
दावा: कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो महंगा हो जाएगा कर्ज
कच्चे तेल की कीमतें अगर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं तो भारत में कर्ज लेना महंगा हो सकता है। ब्रोकिंग कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने कहा, कच्चे तेल के महंगे होने, ब्याज दरों के बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा भी बढ़ेगा और रुपया को भी इससे नुकसान होगा।
मॉर्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों ने कहा, तेल की लगातार ऊंची कीमतों का मतलब यह होगा कि चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.5% से ज्यादा हो जाएगा। अनुमान है कि तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 डॉलर की वृद्धि से भारत की महंगाई 0.5% तक बढ़ सकती है।
ब्रेंट क्रूड अभी 85 डॉलर प्रति बैरल पर है। मॉर्गन स्टेनली ने कहा, दिसंबर तक कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है लेकिन अगले साल इसमें गिरावट आ सकती है। पहले अनुमान लगाया गया कि आरबीआई अगले साल अप्रैल-जून से दरों में कटौती कर सकता है।