घरेलू शेयर बाजार ने शुरूआती बढ़त गंवा दी है। सेंसेक्स और निफ्टी बिकवाली के कारण लाल निशान पर आ गए हैं।
वैश्विक भू-राजनीतिक चिंताओं के कम होने और अमेरिका तथा ईरान के बीच वार्ता फिर से शुरू होने की उम्मीदों के चलते गुरुवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों के बेंचमार्क सूचकांकों- सेंसेक्स और निफ्टी- में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और विदेशी फंडों की वापसी से बाजार की धारणा को सकारात्मक बल मिला है।
बाजार की इस तेजी के बीच कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जबकि कुछ पर दबाव बना रहा:
एशियाई बाजारों में भी मजबूत कारोबारी धारणा देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, शंघाई का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। बुधवार को अमेरिकी बाजार भी अधिकतर बढ़त के साथ ही बंद हुए थे। इस बीच, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.97 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
इनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, "अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू करने की दिशा में प्रगति के इर्द-गिर्द नए सिरे से पैदा हुए आशावाद ने तत्काल भू-राजनीतिक चिंताओं को कम करने में मदद की है, जिससे समग्र जोखिम लेने की क्षमता में वृद्धि हुई है"।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें अब 94-95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल की सीमा में समेकित हो रही हैं, जो घरेलू बाजार के लिए एक सकारात्मक है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने बुधवार को 666.15 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक शांति, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और विदेशी निवेशकों के लौटते भरोसे ने भारतीय बाजारों को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। यदि वैश्विक मोर्चे पर कोई नई नकारात्मक खबर नहीं आती है, तो अल्पकाल में बाजार की यह रिकवरी और स्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।