वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के कारण घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली का दौर शुक्रवार को भी जारी रहा। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,414.33 अंक गिरकर 73,198.10 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 420.35 अंक गिरकर 22,124.70 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में जारी लगातार गिरावट से अब निवेशक इस बात को लेकर परेशान होने लगे हैं कि उन्हें आगे कौन सी रणनीति अपनानी चाहिए?
शुक्रवार की भारी गिरावट के साथ बीएसई सेंसेक्स पिछले साल 27 सितंबर को 85,978.25 के अपने रिकॉर्ड शिखर से अब तक 12,780.15 अंक यानी 14.86 प्रतिशत नीचे आ चुका है। वहीं एनएसई निफ्टी 27 सितंबर, 2024 को 26,277.35 के अपने सर्वकालिक उच्चस्तर से अब तक कुल 4,152.65 अंक यानी 15.80 प्रतिशत टूट चुका है। निफ्टी में 29 वर्षों में सबसे लंबी गिरावट दिखी है। विदेशी पूंजी निकासी, कमजोर आय और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सितंबर 2024 से अब तक निवेशकों को 90 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी में भारतीय शेयर बाजार से फंड निकालना जारी रखा और 34,574 करोड़ रुपये के इक्विटी बेचे। 24 फरवरी से 28 फरवरी तक पूरे सप्ताह में बिक्री का रुझान मजबूत रहा, जिसके दौरान एफपीआई ने 10,905 करोड़ रुपये के इक्विटी बेचे। हालांकि, शुक्रवार को विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए और 1,119 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बावजूद, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखी गई, जिसमें निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में 1.8 फीसदी से अधिक की गिरावट आई। 2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल 1,12,601 करोड़ रुपये के इक्विटी बेचे हैं, जो फंड के लगातार बाजार से बाहर निकाले जाने का संकेत है। एफपीआई की लगातार हो रही निकासी ने बाजार की स्थिरता को प्रभावित किया है, जिससे भारतीय इक्विटी में अस्थिरता आई है।
जनवरी में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 78,027 करोड़ रुपये निकाले थे। पिछले साल दिसंबर में भारतीय इक्विटी में एफपीआई द्वारा किया गया शुद्ध निवेश सकारात्मक रहा, जिसमें 15,446 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ। वर्ष 2024 का अंत सकारात्मक रहा, लेकिन एफपीआई द्वारा भारतीय इक्विटी में शुद्ध खरीद मूल्य में भारी कमी आई, जो घटकर 427 करोड़ रुपये रह गया।
विदेशी निवेशकों की ओर से जारी लगातार बिकवाली ने बाजार सहभागियों के बीच चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनावों के कारण इस बिकवाली के पीछे कुछ प्रमुख कारण हो सकते हैं। इस लगातार बिकवाली का श्रेय काफी हद तक संयुक्त राज्य अमेरिका में राजनीतिक मंच पर डोनाल्ड ट्रम्प की वापसी को दिया जाता है, जिसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। इसके अलावा, भारत सहित उभरते बाजारों से निकासी बढ़ रही है, क्योंकि निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। देश ने 2024 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) प्रवाह में भारी गिरावट का अनुभव किया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में शुद्ध निवेश में 99 प्रतिशत की गिरावट आई।
घरेलू शेयर बाजार में तेज गिरावट के साथ ही शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में निवेशकों की संपत्ति 7.46 लाख करोड़ रुपये घट गई। वैश्विक शेयर बाजारों में नरमी के रुख के बीच बेंचमार्क सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक टूट गया। हाल के दिनों में अमेरिका की ओर से ताजा टैरिफ खतरों ने वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंकाओं को मजबूत किया है जिससे बाजार से विदेशी पूंजी का बाहर जाना लगातार जारी है। यही गिरावट का एक बड़ा और अहम कारण माना जा रहा है। बाजार में तेज गिरावट के बीच अब निवेशक क्या करें? यह बड़ा सवाल है। ज्यादातर जानकार मानते हैं कि जो लोग बाजार में लंबे समय के रिटर्न की आस में आए हैं, उन्हें हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। निवेशकों को बिकवाली करने की जगह संयम से काम लेना चाहिए और अपनी रणनीतियों में बदलाव करते रहना चाहिए।
सेंसेक्स में सूचीबद्ध 30 कंपनियों में से अधिकतर शुक्रवार को लाल निशान पर कारोबार करते दिखे। इंडसइंड बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंफोसिस, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और मारुति के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक के शेयर मुनाफे में रहे। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73.69 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर सपाट रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) गुरुवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 556.56 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से जुड़े संदेह के कारण वॉल स्ट्रीट सूचकांक में भारी गिरावट के बाद एशियाई बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दिखी। जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा मैक्सिको और कनाडा से आयात पर 25% टैरिफ लगाने तथा चीनी उत्पादों पर टैरिफ को दोगुना कर 20% करने के निर्णय से भी निवेशक असमंजस में हैं।
टोक्यो का निक्केई 225 सूचकांक 3.4% गिरकर 36,939.89 पर आ गया। यह गिरावट प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण आई। कंप्यूटर चिप परीक्षण उपकरण निर्माता एडवांटेस्ट में 9.4% की गिरावट आई, एक अन्य उपकरण निर्माता डिस्को कॉर्प में 11.1% की गिरावट आई और टोक्यो इलेक्ट्रॉन में 5.3% की गिरावट आई।
हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक 2.3% गिरकर 23,175.49 पर आ गया, जबकि शंघाई कम्पोजिट सूचकांक 0.9% गिरकर 3,358.28 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.2% गिरकर 2,538.07 पर आ गया। ऑस्ट्रेलिया में, एसएंडपी/एएसएक्स 200 1.1% गिरकर 8,174.10 पर आ गया। गुरुवार को एसएंडपी 500 1.6% गिरकर 5,861.57 पर आ गया और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.4% गिरकर 43,239.50 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 2.8% गिरकर 18,544.42 पर आ गया।
रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 19 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 87.37 पर आ गया। अमेरिकी मुद्रा की मजबूती और घरेलू शेयर बाजारों में नकारात्मक रुख ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिका के शुल्क लगाए जाने को लेकर जारी अनिश्चितता ने वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर दिया है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 87.32 पर खुला और फिर 87.37 प्रति डॉलर पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से 19 पैसे की गिरावट दर्शाता है।