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The Bonus Market Update: शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 300 अंक लुढ़का; निफ्टी 24,500 से नीचे पहुंचा

Tue, 11 Aug 2026 09:39 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में  गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 300 से अधिक अंक गिरा, जबकि निफ्टी 24,500 के स्तर से नीचे आ गया। बढ़ती तेल कीमतों और मध्य पूर्व के तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। जानें बाजार की ताजा स्थिति और प्रमुख गिरावट वाले शेयर।
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सेंसेक्स ओपनिंग बेल - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को शुरुआती कारोबार में बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 320.14 अंक गिरकर 78,204.40 पर आ गया। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 94.35 अंक टूटकर 24,490.85 पर पहुंच गया। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.13 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 87.61 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 95.38 पर आ गया। 

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सेंसेक्स पैक से इंटरग्लोब एविएशन, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, इटरनल और बजाज फाइनेंस नुकसान में रहे। टाइटन, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और इंफोसिस लाभ में रहे। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने बताया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ला दिया है। इससे वॉल स्ट्रीट पर कमजोर बंद और एशियाई बाजारों में सुस्त शुरुआत हुई। उन्होंने कहा कि निवेशक भावनाएं अभी भी नियंत्रित हैं। बातचीत एक अधिक जटिल चरण में प्रवेश कर गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से मुआवजे की मांग की है। वहीं, तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्तें दोहराई हैं। इससे किसी भी संभावित समझौते के समय और स्थायित्व पर संदेह बढ़ गया है। जब तक अधिक स्पष्टता नहीं आती, बाजार सुर्खियों से प्रेरित रहेंगे। निवेशक आक्रामक स्थिति लेने से हिचकिचाएंगे।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों का क्या हाल रहा?

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लाभ में रहा। शंघाई का एस एस ई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक नुकसान में रहे। अमेरिकी बाजार सोमवार को नुकसान के साथ बंद हुए थे। एच एस टी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसलवन राधाकृष्णन ने कहा कि बाजार के प्रतिभागी इंतजार करो और देखो का रुख अपनाएंगे। घरेलू आय का मौसम शेयर-विशिष्ट कार्रवाई का प्राथमिक चालक बना रहेगा। उन्होंने कहा कि निकट अवधि में, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें व्यापक बाजार के लिए तेजी को सीमित कर सकती हैं। यह तेल-संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बनाए रखेंगी।

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

डब्ल्यू टी आई क्रूड 82 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के निशान की ओर वापस चढ़ गया है। ब्रेंट क्रूड 87 अमेरिकी डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा है। यह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी व्यवधानों पर लगातार चिंताओं को दर्शाता है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल आया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे गतिरोध से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को डर है कि आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। 

विदेशी निवेशकों का क्या रुख रहा?

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को 1,974.76 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार है। सोमवार को सेंसेक्स 43.27 अंक या 0.06 फीसदी बढ़कर 78,542.44 पर बंद हुआ था। निफ्टी मामूली रूप से 13.15 अंक या 0.05 फीसदी बढ़कर 24,583.80 पर समाप्त हुआ था। हालांकि, मंगलवार को बाजार में गिरावट देखी गई। विदेशी निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बाजार में दबाव बना रहा। भू-राजनीतिक कारक और कच्चे तेल की कीमतें हावी रहीं।

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