शेयर बाजार में बुधवार को दो दिन की तेजी पर विराम लग गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा प्रमुख नीतिगत दर में बढ़ोतरी के बाद बाजार नीचे बंद हुए। बेंचमार्क सेंसेक्स 429 अंक गिरकर 72,638.70 पर आ गया। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दी। यह लगभग चार साल में पहली बढ़ोतरी है। आरबीआई ने संकेत दिया कि बढ़ती मुद्रास्फीति और कमजोर होती मुद्रा के कारण आगे भी दरें बढ़ाई जा सकती हैं। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर बढ़ाने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। दिसंबर 2024 में गवर्नर संजय मल्होत्रा के पदभार संभालने के बाद यह पहली ऐसी वृद्धि है।
हालांकि इस कदम की व्यापक रूप से उम्मीद थी, केंद्रीय बैंक ने "कैलिब्रेटेड टाइटनिंग" की ओर रुख करके एक आश्चर्य पैदा किया। इस बदलाव ने निकट भविष्य में दर में कटौती की संभावना को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया है। मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति के निर्णयों की घोषणा करते हुए कहा कि निकट अवधि में दर में कटौती संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे की नीतिगत कार्रवाई केवल दर वृद्धि या विराम हो सकती है। यह सब मौजूदा स्थितियों और भविष्य के दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को 2,961.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि आरबीआई की दर वृद्धि के बाद घरेलू बाजार ने नीतिगत रुख में बदलाव पर अधिक तेजी से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वृद्धि अनुमानों में संशोधन ने घरेलू बुनियादी बातों की ताकत की पुष्टि की। हालांकि, उच्च मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और आरबीआई के मूल्य स्थिरता पर जोर ने बाजार की भावना को प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और हैंग सेंग सूचकांक निचले स्तर पर बंद हुए। यूरोप के बाजार भी गिरावट में कारोबार कर रहे थे, जबकि अमेरिकी बाजार मंगलवार को ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे।