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द बोनस मार्केट अपडेट: बाजार में भारी बिकवाली; सेंसेक्स 1100 अंक लुढ़का, निफ्टी 23000 से फिसला, जानिए क्यों?

Mon, 28 Sep 2026 03:52 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1124 अंक और निफ्टी 360 अंक टूटा। ईरान-अमेरिका संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार को प्रभावित किया। जानें गिरावट के मुख्य कारण और वैश्विक बाजारों का हाल।
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सेंसेक्स क्लोजिंग बेल - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बेंचमार्क सेंसेक्स 1,124 अंक गिरकर छह महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 22,800 के स्तर से नीचे आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 फीसदी गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। यह 30 मार्च, 2026 के बाद का सबसे निचला बंद स्तर है। दिन के कारोबार में यह 1,179.51 अंक या 1.59 फीसदी तक गिरकर 72,716.23 पर पहुंच गया था। पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 फीसदी गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ। यह भी लगभग छह महीने का निचला स्तर है।

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निफ्टी के 47 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल तीन शेयरों में वृद्धि देखी गई। यह बाजार में चौतरफा बिकवाली को दर्शाता है। विश्लेषकों ने बताया कि अमेरिकी-ईरान गतिरोध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई। विदेशी फंड की निकासी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल भी गिरावट का कारण बना। कमजोर एशियाई बाजारों ने भी वित्तीय, पीएसयू बैंक, धातु, एफएमसीजी, तेल और गैस तथा ऑटो शेयरों में बिकवाली को बढ़ावा दिया।

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बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?

बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर गतिरोध बना हुआ है। इस गतिरोध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 3.81 फीसदी बढ़कर 108.3 डॉलर प्रति बैरल हो गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को 3,693.93 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार वृद्धि हो रही है। यह भारत-अमेरिका यील्ड स्प्रेड को कम कर रहा है। इससे विदेशी फंड की निकासी की संभावना बढ़ जाती है, जो बाजार की धारणा को सतर्क रखती है। जिओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के विनोद नायर ने कहा कि वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थितियों में गिरावट से निवेशक सतर्क हैं।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई?

सोमवार को सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 29 के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस दौरान लार्सन एंड टुब्रो के शेयर में सबसे ज्यादा 2.81 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पावर ग्रिड के शेयर 2.62 फीसदी, अडानी पोर्ट्स के शेयर 2.38 फीसदी और एचडीएफसी बैंक के शेयर 2.3 फीसदी गिरे। हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर 2.27 फीसदी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2.24 फीसदी नीचे आए। इस व्यापक बिकवाली के बीच, इंफोसिस एकमात्र कंपनी थी जिसके शेयरों में वृद्धि दर्ज की गई। यह बाजार की नकारात्मक प्रवृत्ति के बीच एक अपवाद रहा। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण वित्तीय, पीएसयू बैंक, धातु, एफएमसीजी, तेल और गैस तथा ऑटो शेयरों को भारी नुकसान हुआ।

वैश्विक बाजारों का क्या रुझान रहा?

भारतीय बाजारों की गिरावट के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा। यूरोपीय बाजारों में भी कारोबार मिश्रित नोट पर रहा। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुए थे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में ताजा उछाल और अमेरिकी-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। उन्होंने यह भी बताया कि बिकवाली पूरे सत्र में व्यापक रही।

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