बाजार में गिरावट के मुख्य कारण क्या रहे?
बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर गतिरोध बना हुआ है। इस गतिरोध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में भारी उछाल आया है। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 3.81 फीसदी बढ़कर 108.3 डॉलर प्रति बैरल हो गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को 3,693.93 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार वृद्धि हो रही है। यह भारत-अमेरिका यील्ड स्प्रेड को कम कर रहा है। इससे विदेशी फंड की निकासी की संभावना बढ़ जाती है, जो बाजार की धारणा को सतर्क रखती है। जिओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के विनोद नायर ने कहा कि वैश्विक व्यापक आर्थिक स्थितियों में गिरावट से निवेशक सतर्क हैं।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई?
सोमवार को सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 29 के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस दौरान लार्सन एंड टुब्रो के शेयर में सबसे ज्यादा 2.81 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। पावर ग्रिड के शेयर 2.62 फीसदी, अडानी पोर्ट्स के शेयर 2.38 फीसदी और एचडीएफसी बैंक के शेयर 2.3 फीसदी गिरे। हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर 2.27 फीसदी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2.24 फीसदी नीचे आए। इस व्यापक बिकवाली के बीच, इंफोसिस एकमात्र कंपनी थी जिसके शेयरों में वृद्धि दर्ज की गई। यह बाजार की नकारात्मक प्रवृत्ति के बीच एक अपवाद रहा। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण वित्तीय, पीएसयू बैंक, धातु, एफएमसीजी, तेल और गैस तथा ऑटो शेयरों को भारी नुकसान हुआ।
वैश्विक बाजारों का क्या रुझान रहा?
भारतीय बाजारों की गिरावट के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक और शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा। यूरोपीय बाजारों में भी कारोबार मिश्रित नोट पर रहा। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुए थे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में ताजा उछाल और अमेरिकी-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। उन्होंने यह भी बताया कि बिकवाली पूरे सत्र में व्यापक रही।