भारतीय शेयर बाजार बुधवार को नकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 183.15 अंक की गिरावट के साथ 77,472.94 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 126.80 अंक गिरकर 24,207.75 के स्तर पर बंद हुआ। तेल की कीमतों में कमी आई, जिससे निवेशकों में कुछ राहत की उम्मीद थी। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की नई उम्मीदें भी थीं, क्योंकि ईरान ने ओमान के साथ रणनीतिक जलमार्ग के प्रबंधन पर बातचीत फिर से शुरू करने की बात कही थी। इसके बावजूद बाजार में यह गिरावट देखी गई।
बाजार में इंफोसिस और एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में दो फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, निफ्टी के अधिकांश क्षेत्रीय सूचकांकों ने तेजी के साथ कारोबार किया। यह बाजार में व्यापक सकारात्मक धारणा का संकेत दे रहा था, लेकिन प्रमुख सूचकांकों पर इसका असर नहीं दिखा।
किन क्षेत्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया?
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू बैंक) ने बाजार में बढ़त का नेतृत्व किया। इन बैंकों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई। इसके बाद निजी बैंक और वित्तीय सेवाएं भी तेजी में रहीं, जिससे इन क्षेत्रों को मजबूती मिली। रियलटी, मिड-स्मॉलकैप, सीमेंट और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के शेयर भी आगे बढ़े। धातु और तेल व गैस सूचकांक काफी हद तक स्थिर बने रहे, जो बाजार में संतुलन बनाए रखने में सहायक रहे। इन क्षेत्रों में निवेशकों का भरोसा कायम रहा और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
किन क्षेत्रों पर दबाव रहा?
ऑटो, एफएमसीजी, आईटी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के शेयर पूरे दिन दबाव में रहे। इन क्षेत्रों में बिकवाली का माहौल देखा गया। इस गिरावट ने बाजार की कुल बढ़त को सीमित कर दिया और प्रमुख सूचकांकों को नीचे खींचने में भूमिका निभाई। निवेशकों ने इन क्षेत्रों से दूरी बनाए रखी, जिससे उनके शेयरों में कमजोरी बनी रही। बाजार की समग्र दिशा पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं।
वैश्विक बाजारों का क्या हाल रहा?
टोक्यो समय के अनुसार सुबह 10:50 बजे तक एसएंडपी 500 वायदा 0.3 फीसदी गिरा, जो वैश्विक स्तर पर कुछ कमजोरी का संकेत था। निक्केई 225 वायदा (ओएसई) में भी 0.4 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, जापान का टॉपिक्स 0.2 फीसदी बढ़ा, जिससे वहां के बाजार में थोड़ी स्थिरता दिखी। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 0.1 फीसदी ऊपर रहा। हांगकांग का हैंग सेंग एक फीसदी की अच्छी बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि शंघाई कंपोजिट में 0.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। यूरो स्टॉक्स 50 वायदा में थोड़ा बदलाव आया, जो यूरोपीय बाजारों में अनिश्चितता दर्शाता है।