वैश्विक बाजारों की उथल-पुथल और भड़कते भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ युद्ध विराम समझौते को खत्म घोषित करने के बाद बाजार में चौतरफा बिकवाली तेज हो गई, जिससे पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने की आशंका गहरी हो गई है।
कारोबार के अंत में, बीएसई का सेंसेक्स 1,677 अंक की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि, बुधवार को दोपहर में सेंसेक्स एक समय 1,914 अंक तक टूट गया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी50 भी 581 अंक लुढ़ककर अंततः 23,900 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे समाप्त हुआ। बाजार में मचे इस हाहाकार से निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा और महज एक दिन में उनकी 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई। इसके साथ ही बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 470 लाख करोड़ रुपये रह गया।
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी बैंक, एफएमसीजीऔर ऑयल एंड गैस सूचकांकों में 2% से अधिक की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 भी 2% तक गिरे। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज 5% और मारुति सुजुकी 4% टूटे, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर, कोटक महिंद्रा बैंक और भारती एयरटेल में भी 2 से 4 फीसदी की गिरावट रही। एनएसई पर केवल 694 शेयरों की तेजी के मुकाबले 2,525 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में उतार-चढ़ाव मापने वाला इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 27% उछलकर 14.85 पर पहुंच गया, जो निवेशकों के बीच बढ़े गहरे डर को दिखाता है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार के अनुसार, "अमेरिकी-ईरान तनाव और क्रूड में तेजी से बाजार अनिश्चितता में है। हालांकि, मजबूत घरेलू फंडामेंटल्स और दक्षिण कोरिया व ताइवान के मुकाबले भारत में विदेशी निवेश की संभावना राहत देने वाली है।"