विकसित भारत के निर्माण के लिए मोदी सरकार का जोर बुनियादी ढांचा विकास और नवाचार को बढ़ावा देने पर रहा है। इस आम बजट में भी सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए अपनी पुरानी प्रतिबद्धता दोहराई है। खासतौर से बुनियादी ढांचा विकास के लिए पहले से कई परियोजनाएं चल रही हैं। सरकार ने कई तरह के साहसिक सुधार किए हैं। बावजूद इसके इस आम बजट में भी उसने दृढ़ता से अपनी बनाई पुरानी राह पर तेजी से आगे बढ़ने का संकेत दिया है।
विज्ञापन
आम बजट के सभी परिदृश्यों की बात करें तो यह मुख्यत: मध्य वर्ग केंद्रित बजट है। इसके अलावा सरकार की दूसरी प्राथमिकता विकास दर है। ऐसा लगता है कि सरकार का जोर बुनियादी ढांचा विकास को केंद्र में रखते हुए विकास दर को बनाए रखने की है। आम बजट की घोषणाओं के जरिये वित्त मंत्री ने मोदी सरकार के करीब 11 साल के कार्यकाल में आयकर में बड़ी छूट देकर पहली बार मुख्यत: मध्य वर्ग की सुध ली है। उसकी क्रय शक्ति बढ़ाने के साथ बचत की गुंजाइश की भी चिंता की है। जहां तक बुनियादी ढांचा विकास और नवाचार क्षेत्र की बात है तो इनके लिए दो अहम घोषणाएं हैं। पहला राज्यों को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 50 साल तक ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 1.5 लाख करोड़ रुपये मुहैया कराना। दूसरा अगले 5 वर्षों में नई परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना के जरिये नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 10 लाख करोड़ जुटाना। राज्य पीपीपी मॉडल के जरिये प्रस्ताव तैयार कर इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड के तहत केंद्र से मदद पा सकेंगे। जाहिर तौर पर बुनियादी ढांचा विकास के लिए सरकार की पूर्व से चले आ रहे प्रयासों के अतिरिक्त यह अलग तरह की कोशिश होगी।
राशि जुटाने के लिए नए तरीके ढूंढ़ रही सरकार
आम बजट की घोषणाओं का निहितार्थ यह है कि केंद्र सरकार बुनियादी ढांचा क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी राशि जुटाने के नए-नए तरीके ढूंढ़ रही है। इसका एक अर्थ यह भी है कि सरकार यह आश्वस्त करना चाहती है कि इस क्षेत्र की विकास परियोजनाओं के लिए धन की कमी नहीं रहने दी जाएगी।