केंद्रीय प्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने करदाताओं की संपत्ति जब्त करने के मामले में सावधानी बरतने का निर्देश दिया है। सीबीआईसी ने क्षेत्रीय कर अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा है कि संपत्ति जब्त करने का कदम असाधारण परिस्थितियों में ही उठाया जाना चाहिए।
सीबीआईसी ने क्षेत्रीय कर अधिकारियों को जारी किए निर्देश
सीबीआईसी के अनुसार, करदाताओं की संपत्ति जब्त करने से पहले क्षेत्रीय आयुक्त को अपराध की श्रेणी कर्मचारी में शामिल राशि और उसकी रिकॉर्ड फाइल को खंगालना होगा। संपत्ति जब्त करने का फैसला हर मामले में नहीं लिया जा सकता, जब तक अपराध की श्रेणी गंभीर न हो या असाधारण परिस्थितियां कोई भी यह कदम नहीं उठा सकते। संपत्ति जब्त करने की अवधि भी 1 साल की होगी।
अधिकारी पहले अचल संपत्ति को जब्त करेंगे। अगर इससे अपराध में शामिल राशि की भरपाई नहीं होती है, तो चल संपत्ति भी जब्त की जा सकती है। हालांकि करदाता इसके एवज में अचल संपत्ति देने की बात करता है, तो चल संपत्ति के रूप में जब्त खाते, शेयर या अन्य संपत्तियां को छोड़ना होगा।
इन मामलों में जब्ती का अधिकार
- कर चोरी के मकसद से बिना बिल के सेवा या उत्पादन बेचना।
- बिना सेवा या उत्पाद की आपूर्ति के फर्जी बिल बनाना।
- धोखाधड़ी के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट वसूलना।
- कर के रूप में वसूली राशि को 3 महीने तक सरकार के खाते में नहीं जमा कराना।