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कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में बड़ा बदलाव: खुदरा निवेशकों के लिए सेबी ला रहा है नया नियम, जानें क्या होगा असर

Mon, 24 Aug 2026 03:25 PM IST
Navita R Asthana पीटीआई, अमर उजाला, मुंबई

सार

कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सेबी जल्द ही नया वितरण ढांचा और परामर्श पत्र जारी करने जा रहा है। जानिए कैसे आसान होगी निवेश की प्रक्रिया और क्या हैं बदलाव के मुख्य संकेत।
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Investment - फोटो : AdobeStock
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विस्तार
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भारतीय पूंजी बाजार में खुदरा (रिटेल) निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के बीच प्रतिभूति बाजार नियामक, सेबी कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को अधिक सुलभ तथा पारदर्शी बनाने के लिए जल्द ही एक विस्तृत परामर्श पत्र जारी करेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ऋण बाजार (डेट मार्केट) को गहरा करना और आम निवेशकों के लिए निवेश की राह को आसान बनाना है। हाल ही में आयोजित 'बॉन्ड फेस्टिवल' कार्यक्रम के दौरान सेबी की कार्यकारी निदेशक मनिंदर चीमा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि नियामक बॉन्ड के लिए संभावित वितरण ढांचे पर काम कर रहा है, जिसे कुछ ही दिनों में जारी किया जाएगा।

सेबी के लिए यह परामर्श पत्र लाना क्यों आवश्यक हो गया है?

वर्तमान में, भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में सार्वजनिक निर्गम की हिस्सेदारी कुल बॉन्ड निर्गम के 1 प्रतिशत से भी कम है। अधिकांश बॉन्ड निजी तौर पर जारी किए जाते हैं, जिससे आम निवेशकों की पहुंच इन तक नहीं हो पाती थी। हालांकि, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स (OBPs) की पहुंच इस दिशा में एक बड़ी पहल रही है। ये प्लेटफॉर्म तकनीक के माध्यम से निजी तौर पर जारी बॉन्ड को खुदरा निवेशकों तक पहुंचा रहे हैं और इन्हें सभी के लिए सुलभ बना रहे हैं। सेबी अब इस पूरी व्यवस्था को एक मजबूत वितरण ढांचे के तहत लाना चाहता है, ताकि तकनीक की मदद से पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुलभ और कुशल बनाया जा सके।

निवेशकों की संख्या में वृद्धि और बाजार की क्षमता क्या दर्शाती है?

भारत के निश्चित आय (फिक्स्ड-इनकम) बाजार में विकास और लोगों तक पहुंच बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले केवल चार महीनों में ही डेट निवेशकों की संख्या 3.25 गुना बढ़ी है, जो इस क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाती है। जैसे-जैसे निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता ला रहे हैं, बॉन्ड को अधिक सुलभ बनाना बाजार की मजबूती के लिए जरूरी होगा। एनएसडीएल के सीबीओ समीर पाटिल के अनुसार, भारतीय पूंजी बाजार में खुदरा भागीदारी तेजी से बढ़ी है और बॉन्ड बाजार अपनी विविधता के कारण आम निवेशकों के पोर्टफोलियो में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसके लिए बेहतर जागरूकता, आसान पहुंच और पारदर्शिता की निरंतर आवश्यकता है।

वितरकों की नई श्रेणी से आम निवेशकों को क्या लाभ होगा?

बाजार में खुदरा भागीदारी बढ़ाने के लिए सेबी वितरकों की एक नई श्रेणी शुरू करने के प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा है। गत 13 मई को, सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा था कि म्यूचुअल फंड की सफल मिसाल की तरह ही नए वितरक होने चाहिए। ये वितरक केवाईसी औपचारिकताओं, दस्तावेजीकरण और लेनदेन को सरल बनाकर आम निवेशकों की निवेश प्रक्रिया आसान कर सकते हैं। ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म ग्रिप इन्वेस्ट के संस्थापक और ग्रुप सीईओ निखिल अग्रवाल के मुताबिक, उद्योग जगत के खिलाड़ियों और संगठनों ने इस नए ढांचे के संबंध में सेबी को अपने महत्वपूर्ण सुझाव और सिफारिशें पहले ही सौंप दी हैं।

क्या हैं इस पूरे सुधार के मुख्य टेकअवे और भविष्य की राह?

कॉर्पोरेट बॉन्ड के नए वितरण ढांचे से न केवल खुदरा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि बाजार में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों को बॉन्ड की कीमत, प्रतिफल और अन्य विशेषताओं के बारे में जानना आवश्यक है। तकनीक और सुचारू नियमों के समन्वय से यह पूरी संरचना अधिक पारदर्शी और कुशल बनने जा रही है, जो भारतीय ऋण बाजार को और अधिक गहरा तथा मजबूत बनाएगी।

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