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सेबी का बड़ा फैसला: विदेशी निवेशकों के लिए अब डिजिटल हस्ताक्षर से निवेश होगा आसान, जानिए क्या अपडेट

Thu, 20 Aug 2026 06:02 PM IST
कुमार विवेक बिजरेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय पूंजी बाजार नियामक सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया है। अब वे डिजिटल हस्ताक्षर वाले पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग कर सकेंगे, जिससे कारोबार करना आसान होगा।
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एफपीआई के लिए भारत में निवेश होगा आसान। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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पूंजी बाजार नियामक सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब विदेशी निवेशक डिजिटल हस्ताक्षर वाले पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये अपना पंजीकरण करा सकेंगे। इस बदलाव से एफपीआई के लिए भारत में निवेश करना और भी सरल हो जाएगा। यह निर्णय कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के सेबी के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

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सेबी ने गुरुवार को इस बारे में नए नियम जारी किए। संशोधित नियम के तहत, एक एफपीआई अपने कस्टोडियन को पावर ऑफ अटॉर्नी दे सकता है। इसमें एफपीआई का पूरा पता दर्ज होगा। यह दस्तावेज सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार डिजिटल हस्ताक्षर से निष्पादित किया जा सकेगा। पावर ऑफ अटॉर्नी एक कानूनी दस्तावेज है जिसके माध्यम से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक अपने कस्टोडियन को अपनी ओर से कार्य करने के लिए अधिकृत करता है। कस्टोडियन एक वित्तीय संस्था है जो निवेशकों की प्रतिभूतियों और परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखती है। वे एफपीआई पंजीकरण, व्यापार निपटान, प्रबंधन और नियामक अनुपालन रिपोर्टिंग का काम भी करते हैं।

क्या है सेबी का नया नियम?

सेबी के नए नियम से पावर ऑफ अटॉर्नी के नोटरीकरण, अपोस्टिलाइजेशन या कौंसुलराइजेशन की आवश्यकता समाप्त हो गई है। इससे एफपीआई के पंजीकरण में लगने वाला कुल समय काफी कम हो जाएगा। यह विदेशी निवेशकों के लिए भारत में कारोबार करने की सुगमता को बेहतर बनाएगा। यह कदम एफपीआई पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के सेबी के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। यह महत्वपूर्ण परिपत्र 20 अगस्त, 2026 से प्रभावी हो गया है।

डिजिटलीकरण की दिशा में क्या हैं सेबी के अन्य कदम?

सेबी ने पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में कई उपाय किए हैं। इनमें एफपीआई पंजीकरण के लिए एक सामान्य आवेदन पत्र (सीएएफ) शामिल है। पैन, बैंक और डीमैट खाते भी इसमें शामिल हैं। भारतीय डिजिटल हस्ताक्षरों को सीएएफ और अन्य पंजीकरण दस्तावेज के लिए अनुमति दी गई है। सीएएफ पोर्टल के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर की कार्यक्षमता भी जोड़ी गई है। स्कैन की गई प्रतियों के आधार पर पंजीकरण प्रदान करना भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

विदेशी निवेशकों को क्या लाभ होगा?

इस पहल से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए भारत में निवेश प्रक्रिया और सुव्यवस्थित होगी। कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक बाधाएं काफी कम हो जाएंगी। इससे वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाजार अधिक आकर्षक बनेगा। यह भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में सहायक होगा। सेबी का यह निर्णय देश में निवेश के माहौल को और मजबूत करेगा, जिससे आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।

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