बाजार नियामक सेबी ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से प्रतिभूति बाजार में सुरक्षित और कुशल भुगतान सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था ‘पे राइट’का प्रस्ताव दिया। सेबी ने पंजीकृत बाजार मध्यस्थों को एक विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक यूपीआई आईडी बनाने का सुझाव दिया है। इससे निवेशकों के लिए यह पुष्टि करना आसान हो जाएगा कि वे सिर्फ पंजीकृत संस्थाओं को ही भुगतान कर रहे हैं।
सेबी ने साथ ही पूंजी बाजार लेनदेन के लिए यूपीआई भुगतान सीमा दो लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रतिदिन करने का प्रस्ताव दिया है। एनपीसीआई के परामर्श से समय-समय पर इसका मूल्यांकन किया जाएगा। सेबी ने इन प्रस्तावों पर 21 फरवरी तक जनता की टिप्पणियां मांगी हैं। सेबी ने 2019 से बाजार में भुगतान के तरीके के रूप में यूपीआई को लागू किया है। हालांकि, अपंजीकृत संस्थाओं की ओर से निवेशकों को गुमराह करने और धोखाधड़ी से धन एकत्र करने का मामले बढ़ते जा रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए खास अल्फान्यूमेरिक यूपीआई आईडी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इससे निवेशकों को उन अपंजीकृत संस्थाओं की पहचान करने, उन्हें अलग करने और बचने में मदद मिलेगी जिनकी इस विशिष्ट यूपीआई हैंडल तक पहुंच नहीं होगी।
भुगतान पर आएगा हरे रंग का थम्सअप का निशाान
सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक, सत्यापित मध्यस्थों को भुगतान किए जाने पर हरे रंग के त्रिकोण के अंदर एक विशेष ‘थम्सअप’ चिह्न दिखाई देगा। यदि चिह्न गायब है, तो यह निवेशकों को अनधिकृत संस्थाओं को भुगतान करने के संभावित जोखिमों के बारे में चेतावनी देगा। इस प्रणाली के क्रियान्वयन की लागत कम होने की उम्मीद है, क्योंकि इसमें सेबी, एनपीसीआई, बैंकों और पंजीकृत मध्यस्थों के बीच गठजोड़ शामिल है।
‘पे राइट’ से मजबूत होगा निवेशकों का विश्वास...सेबी प्रमुख ने ‘पे राइट’ पहल के बारे में बताया कि यह निवेशकों को मजबूत केवाईसी के माध्यम से उस यूपीआई आईडी की प्रामाणिकता को सत्यापित करने में सक्षम बनाएगी जिस पर वे पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं। यह उपाय डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए बनाया गया है।