शेयर बाजार में धोखाधड़ी या मजाक (स्पूफिंग) में खरीद या बिक्री ऑर्डरों पर अंकुश के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के नए नियम सोमवार से लागू हो गए हैं। नए नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह की हरकतों को दोहराता है, तो उसके कारोबार को 15 मिनट से दो घंटे तक रोका जा सकता है।
क्या है स्पूफिंग ?
'स्पूफिंग' में शेयर कारोबारी बड़ी संख्या में खरीद या बिक्री ऑर्डर करते हैं। लेकिन इन ऑर्डरों के क्रियान्वयन से पहले ही वे इसे रद्द कर देते हैं। इस संदर्भ में बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार बड़े ऑर्डर रद्द होने से शेयर कीमतों में बढ़ोतरी या कमी आती है, जिससे खुदरा निवेशक प्रभावित होते हैं।
बीएसई और एनएसई के पिछले महीने जारी सर्कुलर के अनुसार, 'सेबी और एक्सचेंजों ने ऑर्डर के स्तर पर निगरानी को मजबूत करने का फैसला किया है। इससे बड़ी संख्या में ऑर्डरों में संशोधन या उन्हें रद्द करने पर रोक लगेगी।' नए उपाय ग्राहक के अलावा ब्रोकर के स्तर पर रोजाना की कारोबारी गतिविधियों पर लागू होंगे।
सेबी ने घटाई थी निवेशकों का पैसा लौटाने की समयसीमा
मालूम हो कि हाल ही में बाजार नियामक सेबी ने एक और नियम में बदलाव किया था। सेबी ने निवेशकों का पैसा लौटाने की समयसीमा कम कर चार दिन करने का निर्णय किया था। इसके तहत अगर निवेशक को न्यूनतम संख्या में संबंधित शेयर नहीं मिलता है या निर्गम जारी करने वाला शेयर बाजारों से सूचीबद्ध होने या कारोबार की मंजूरी प्राप्त करने में विफल रहता है, उसे ऐसी स्थिति में निवेशकों का पैसा चार दिन में लौटाना होगा। इस समयसीमा को कम कर अब चार दिन कर दिया गया है।
इस बात पर गौर करते हुए समयसीमा कम की गई है कि सार्वजनिक निर्गम में सभी आवेदनकर्ताओं के लिए एएसबीए (एप्लीकेशन सपोर्टेड बाई ब्लॉक्ड अमाउंट) अब अनिवार्य है। इस व्यवस्था के तहत आवेदन राशि का हस्तांतरण नहीं होता बल्कि उसे निवेशक के खाते में 'रोक कर रखा जाता है।' शेयर आबंटन होने के बाद ही राशि ली जाती है।