सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग मामले में इंडसइंड बैंक के छह अधिकारियों के खिलाफ जांच कर रहा है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि इन अधिकारियों ने बैंक में अकाउंटिंग से जुड़ी खामियों के बारे में जानकारी होने के बावजूद स्टॉक ऑप्शन बेचे थे, जबकि बैंक में सार्वजनिक रूप से इनका खुलासा नहीं किया गया था।
मामले से जुड़े दो सूत्रों ने बताया, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) इन छह अधिकारियों की ओर से किए गए ट्रेड के समय की जांच कर रहा है, ताकि यह पता लग सके कि क्या इस बिक्री के जरिये बैंक के नियमों और आंतरिक आचार संहिता का उल्लंघन किया गया है। जांच अभी शुरुआती चरण में है। हालांकि, सेबी ने अभी तक इन अधिकारियों एवं बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया है और न ही कोई जवाब मांगा है।
इस मामले की फॉरेसिंक जांच करने वाली ऑडिट एवं सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन ने खुलासा किया था कि बैंक के दो अधिकारिकों को अकाउंटिंग संबंधी चूक के बारे में जानकारी थी। इसके बाद भी उन्होंने सार्वजनिक किए जाने से पहले शेयरों में ट्रेडिंग की। सेबी ने बैंक ने रिपोर्ट की एक कॉपी मांगी है।
अदाणी समूह में निवेश करने वाले मॉरीशस के दो फंड्स का लाइसेंस रद्द कर सकता है सेबी
लगातार दो साल से शेयरधारिता विवरण साझा नहीं करने पर बाजार नियामक सेबी ने अदाणी समूह में निवेश करने वाले मॉरीशस के दो फंड्स को लाइसेंस रद्द करने और जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है। 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के बाद से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) अदाणी समूह और उसके 13 ऑफशोर निवेशकों की जांच कर रहा है। सेबी के 28 मार्च के एक दस्तावेज के मुताबिक, मॉरीशस के दो फंड्स एलारा इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड्स और वेस्पेरा फंड को 2023 से अपने सभी शेयरधारकों के बारे में जानकारी देने को कहा जा रहा है। लेकिन, दोनों विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने बिना किसी कारण अभी तक यह जानकारी मुहैया नहीं कराई है।
देरी से अदाणी समूह की जांच में बाधा
सेबी ने कहा, इस देरी से अदाणी समूह की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता मानदंडों के अनुपालन की जांच में बाधा उत्पन्न हुई है। दस्तावेज के मुताबिक, एलारा फंड्स ने अदाणी समूह में पांच फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का भी खुलासा नहीं किया है। ये दोनों फंड्स सेबी के साथ पंजीकृत हैं। दो सूत्रों ने बताया कि दोनों ने अपराध स्वीकार किए बिना जुर्माना देकर मामला निपटाने के लिए सेबी के पास आवेदन किया है।
सीईओ और डिप्टी सीईओ का पिछले माह ही इस्तीफा
इंडसइंड बैंक ने मार्च में बताया था कि आंतरिक डेरिवेटिव ट्रेड के गलत अकाउंटिंग के कारण उसकी 60.8 अरब डॉलर की बैलेंसशीट में 1,965.08 करोड़ रुपये (23 करोड़ डॉलर) की गड़बड़ियां मिली थी। मामला सामने के बाद बैंक के सीईओ सुमंत कठपालिया और डिप्टी सीईओ अरुण खुराना ने अप्रैल में इस्तीफा दे दिया था।
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