बाजार नियामक सेबी ने कॉफी डे एंटरप्राइजेज पर सब्सिडियरी कंपनियों के जरिए एक अन्य कंपनी में फंड डायवर्ट करने के लिए 26 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कॉफी डे एंटरप्राइजेज कैफे कॉफी डे का संचालन करती है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि कंपनी को 45 दिनों के भीतर जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, सेबी ने कॉफी डे एंटरप्राइजेज लिमिटेड को मैसूर अमलगमेटेड कॉफी एस्टेट्स लिमिटेड (MACEL) और इससे जुड़ी कंपनियों से देय ब्याज के साथ पूरे बकाया की वसूली के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है। साथ ही बकाया राशि की वसूली के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए कंपनी को एनएसई के परामर्श से एक स्वतंत्र कानूनी फर्म नियुक्त करने की आवश्यकता है।
सेबी ने अपनी जांच में पाया कि कॉफी डे एंटरप्राइजेज (सीडीईएल) की सात सब्सिडियरी कंपनियों से 3,535 करोड़ रुपये की राशि मैसूर अमलगमेटेड कॉफी एस्टेट्स लिमिटेड को भेजी गई, जो सीडीईएल के प्रमोटरों से संबंधित कंपनी है। सेबी के मुताबिक सात सब्सिडियरी कंपनियों से MACEL को जो फंड ट्रांसफर किया गया, वह वीजी सिद्धार्थ, उनके परिवार और संबंधित संस्थाओं के व्यक्तिगत खातों में गया है। इस प्रकार यह पैसा सिस्टम में बना हुआ है।
कॉफी डे ग्रुप के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ ने जुलाई 2019 में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। ऐसा कहा गया था कि उन्होंने निदेशक मंडल और कॉफी डे परिवार को संबोधित एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने खुलासा किया था कि कर्ज के कारण वह सदमे में थे।
वीजी सिद्धार्थ के परिवार की MACEL में 91.75 प्रतिशत हिस्सेदारी
सेबी के बयान के अनुसार, लगभग 91.75 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वीजी सिद्धार्थ के परिवार के पास MACEL का मालिकाना हक है। साथ ही, यह परिवार सीडीईएल का प्रमोटर है। नियामक ने कहा कि 31 जुलाई, 2019 तक 3,535 करोड़ रुपये के कुल बकाया में से सब्सिडियरी कंपनियां 30 सितंबर, 2022 तक 110.75 करोड़ रुपये की राशि की वसूली करने में सफल रही हैं। फंड हेराफेरी को देखते हुए सेबी ने धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित उल्लंघनों के लिए 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।