भारतीय पूंजी बाजार में एक बड़ा बदलाव आया है। सेबी ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) को इक्विटी के रूप में वर्गीकृत कर दिया है। यह कदम निवेशकों, म्यूचुअल फंड उद्योग और रियल एस्टेट सेक्टर, सभी के लिए महत्वपूर्ण है। अब तक रीट्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (इनविट्स) को हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट की श्रेणी में रखा गया था, जिसमें संस्थागत निवेशकों के लिए सब-लिमिट लागू थी। सेबी के नए फैसले ने पूंजी बाजार में रीट्स की संभावनाओं के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं।
बाजार का आकार और संभावनाएं
भारतीय रीट्स की कुल प्रबंधित संपत्तियां (एयूएम) 2.25 लाख करोड़ हैं। अब तक 36,000 करोड़ इक्विटी के रूप में जुटाए गए हैं। यह भले ही म्यूचुअल फंड उद्योग के 75 लाख करोड़ के एयूएम से छोटा हो, लेकिन इतने कम समय में यह उपलब्धि उल्लेखनीय है। आने वाले वर्षों में रीट्स का आकार तेजी से बढ़ेगा।
सेबी ने इसलिए दिया इक्विटी का दर्जा
सेबी ने शुरू में सतर्कता बरतते हुए इन्हें हाइब्रिड श्रेणी में रखा था। अब जब निवेशक आधार बढ़ चुका है और रीट्स ने स्थिर प्रदर्शन दिखाया है, तब इक्विटी में शामिल किया गया है। इस बदलाव से इनका समावेश शेयर बाजार के सूचकांकों में संभव हो गया है। अब पैसिव फंड और ईटीएफ भी इनकी यूनिट्स में निवेश करेंगे।
सेबी के फैसले का असर, बढ़ी दिलचस्पी
सेबी की घोषणा के साथ ही पांचों सूचीबद्ध रीट्स की कीमतों में वृद्धि देखी गई। बाजार की धारणा मजबूत हुई और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। पहले चुनिंदा म्यूचुअल फंड्स ही रीट्स में निवेश कर रहे थे। उदाहरण के लिए, अगस्त, 2025 में पराग परिख कंजरवेटिव हाइब्रिड फंड ने अपने कुल एयूएम का 9.2 फीसदी रीट्स में लगाया था, जो 10 फीसदी की सीमा के भीतर था। लेकिन, अब यह सीमा हटने से फंड हाउस अधिक स्वतंत्रता के साथ रीट्स में निवेश कर सकेंगे।
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