पुणे में मौजूद इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग के खिलाफ बड़ा मामला सामने आया है। भारतीय शेयर बाजार के नियामक सेबी (SEBI) ने अपनी जांच में पाया कि कंपनी का ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) प्लांट सिर्फ कागजों में ही है, असल में वहां कोई उत्पादन नहीं हो रहा। साथ ही सेबी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि प्लांट में सिर्फ 2-3 मजदूर मौजूद थे और बिजली बिल भी बहुत कम आया था, जिससे यह साफ हुआ कि कारखाने में कोई गतिविधि नहीं चल रही थी।
बता दें कि यह जांच एक शिकायत के बाद शुरू हुई थी जिसमें शेयर की कीमतों में हेरफेर और फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। जेनसोल ने दावा किया था कि उसे एक ऑटो एक्सपो में 30,000 ईवी की प्री-बुकिंग मिली, लेकिन जांच में पाया गया कि ये सिर्फ इच्छा पत्र (MOU) थे, जिनमें न तो कीमत का जिक्र था और न ही डिलीवरी का।
जांच में ये बातें आई सामने
अब बात अगर सेबी की करें तो सेबी को जून 2024 में एक शिकायत मिली थी कि कंपनी अपने शेयर की कीमतों में हेरफेर कर रही है। साथ ही फंड का गलत इस्तेमाल कर रही है। इस शिकायत के बाद सेबी ने जांच शुरू की। सेबी के कहने पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का एक अधिकारी 9 अप्रैल 2025 को पुणे के चाकन में स्थित जेनसोल के ईवी प्लांट का दौरा करने गया। वहां पर उसे केवल 2-3 मजदूर ही मिले। बिजली का बिल भी बहुत कम था, जिससे साफ हो गया कि वहां कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा था।
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फंड के गलत इस्तेमाल का दावा
सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, जेनसोल ने सरकार से 977 करोड़ रुपये का कर्ज (लोन) लिया था, जिसमें से 663 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए थे। कंपनी ने कहा कि उसने 4,704 गाड़ियाँ खरीदीं, जिन पर 567 करोड़ रुपये खर्च हुए। बाकी के 262 करोड़ रुपये का कोई हिसाब नहीं दिया गया। जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने जो पैसे गाड़ियों के लिए लिए थे, उन्हें प्रमोटरों से जुड़ी निजी कंपनियों को भेजा गया। कुछ पैसे महंगे अपार्टमेंट खरीदने, रिश्तेदारों को देने और निजी खर्चों में भी इस्तेमाल किए गए।
झूठे निकले कंपनी के दावे
गौरतलब है कि कंपनी ने जनवरी 2025 में दावा किया था कि उसे एक ऑटो एक्सपो में 30,000 इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्री-ऑर्डर मिले हैं। लेकिन जांच में सामने आया कि ये सिर्फ कुछ कंपनियों के साथ किए गए समझौता पत्र (एमओयू) थे, जिनमें न तो गाड़ियों की कीमत तय थी और न ही डिलीवरी की तारीख। इसके अलावा, कंपनी ने एक और दावा किया था कि उसने अपनी अमेरिकी शाखा को 350 करोड़ रुपये में बेचने के लिए समझौता किया है। लेकिन सेबी को उसका भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
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गड़बड़ियों को देख सेबी ने उठाए कदम
कंपनी में गड़बड़ियों को देख सेनी ने कुछ अहम कदम उठाए है। इसके तहत सेबी ने जेनसोल और उसके प्रमोटरों को शेयर बाजार से बैन कर दिया है। साथ ही अनमोल और पुनीत जग्गी को कंपनी के किसी भी अहम पद पर बने रहने से रोक दिया गया है। वहीं कंपनी के 1:10 स्टॉक स्प्लिट प्लान को भी रोक दिया गया है।
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