फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

School Job Scam: लंबित मामलों पर साक्षात्कार देना जजों का काम नहीं, SC ने इस केस में मांगी रिपोर्ट

Mon, 24 Apr 2023 02:57 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

School Job Scam: प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंदाचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय द्वारा एक समाचार चैनल को कथित तौर पर मामले के बारे में दिए गए कथित साक्षात्कार पर कड़ा संज्ञान लिया और कहा, ''एक न्यायाधीश को लंबित मामलों के बारे में साक्षात्कार देने का कोई अधिकार नहीं है।"
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से जज के इंटरव्यू देने के मामले में चार दिनों में रिपोर्ट मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा है कि जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने घूस लेकर स्कूल जॉब देने के मामले में एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार दिया है नहीं।

विज्ञापन


प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय की ओर से एक समाचार चैनल को कथित तौर पर मामले के बारे में दिए गए कथित साक्षात्कार पर कड़ा संज्ञान लिया और कहा, ''एक न्यायाधीश को लंबित मामलों के बारे में साक्षात्कार देने का कोई अधिकार नहीं है।"

उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगा दी थी रोक 
पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से कहा कि वह गुरुवार को या उससे पहले न्यायाधीश का निर्देश लेने के बाद एक रिपोर्ट दाखिल करें। साथ ही कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई के लिए एक दिन बाद का समय तय किया। शीर्ष अदालत ने 17 अप्रैल को कलकत्ता उच्च न्यायालय के 13 अप्रैल के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को मामले में आरोपी बनर्जी और कुंतल घोष से पूछताछ करने और उसके आधार पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
विज्ञापन


अभिषेक बनर्जी ने लगाया था आरोप- कुंतल घोष पर उनका नाम लेने के लिए डाला जा रहा दबाव
इससे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस को कथित घोटाले की जांच कर रहे सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के सार्वजनिक भाषण का संज्ञान लिया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि मामले में आरोपी कुंतल घोष पर केंद्रीय जांच एजेंसियां उनका नाम लेने के लिए दबाव डाल रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें