देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (VIL) के लिए 27 अक्तूबर का दिन बेहद रहेगा। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कंपनी की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उसने दूरसंचार विभाग की ओर से लगाए गए अतिरिक्त एजीआर की बकाया मांग खत्म करने की गुहार लगाई है। यह सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद सुप्रीम कोर्ट की पहली ही कार्यवाही में होगी। यह सुनवाई पहले कई बार टल चुकी है। दरअसल, वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग के 5,606 करोड़ रुपये के नए एजीआर डिमांड को लेकर आपत्ति जताई है। कंपनी का कहना है कि विभाग ने जो बकाया मांगा है, उसमें कई गड़बड़ियां और दोहराव (डुप्लीकेशन) हैं। इसलिए पूरे हिसाब को ‘डिडक्शन विरिफिकेशन गाइडलाइंस' के तहत दोबारा परखा जाए।
क्या है एजीआर से जुड़ा पूरा विवाद?
एजीआर यानी एडजसटेड ग्रॉस रेवेन्यू वह आय है जिसके आधार पर टेलीकॉम कंपनियां सरकार को लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम चार्ज देती हैं। पहले एजीआर में सिर्फ टेलीकॉम कमाई नहीं बल्कि अन्य आमदनी जैसे ब्याज, संपत्ति बिक्री या निवेश का लाभ भी शामिल होता था। इसी को लेकर कंपनियों और सरकार के बीच वर्षों से विवाद चला आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अब सरकार खुद भी वोडाफोन आइडिया में करीब 50% हिस्सेदारी रखती है। ऐसे में केंद्र ने भी कोर्ट में कहा है कि “कंपनी के अस्तित्व को बचाने के लिए कोई रास्ता निकालना जरूरी है।”
लंबे समय से लटकी एजीआर पर सुनवाई
यह मामला पहले भी कई बार टल चुका है। कभी कंपनी की ओर से तो कभी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तरफ से समय मांगा गया। अब उम्मीद है कि 27 अक्तूबर की सुनवाई में इस पर कोई ठोस दिशा तय हो सकती है।
अब तक मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है, कंपनियों ने क्या दलील दी है?
हालांकि, 2019 में एजीआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि विभाग की ओर से जो बकाया तय किया गया है, वही “अंतिम” होगा। 2020 में अदालत ने टेलीकॉम कंपनियों को 10 साल में बकाया चुकाने की मोहलत दी थी। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अब इस पर फिर से कोई हिसाब-किताब या विवाद नहीं होगा। दूसरी ओर, वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों का कहना है कि बकाया की गणना में कई गणितीय गलतियां हैं और कुछ रकम दो-दो बार जोड़ी गई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में ऐसी सभी रीव्यू पिटीशनों को खारिज कर दिया था। अब बड़ा सवाल है कि क्या इस बार वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत मिलेगी या अदालत अपने पुराने रुख पर कायम रहोगी।