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GMR: सुप्रीम कोर्ट ने जीएमआर अध्यक्ष को फार्महाउस खाली करने के निर्देश पर रोक लगाई, जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 10 Sep 2025 03:04 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

GMR: न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ डायल की दायर अपील पर ओंकार इन्फोटेक और जीएमआर सोलर एनर्जी को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी। क्या है पूरा मामला, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा लिमिटेड और जीएमआर समूह की संस्थाओं को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली स्थित पुष्पांजलि फार्म खाली करने का निर्देश दिया गया था। इस फार्महाउस का इस्तेमाल वर्तमान में जीएमआर समूह के अध्यक्ष जीएम राव के निवास के रूप में किया जा रहा है।

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न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ डायल की दायर अपील पर ओंकार इन्फोटेक और जीएमआर सोलर एनर्जी को नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर के लिए स्थगित कर दी। संपत्ति के मालिक ओंकार इन्फोटेक की याचिका पर उच्च न्यायालय ने 1 सितंबर को डायल और जीएमआर समूह को परिसर खाली करने का निर्देश दिया था।

संपत्ति के पूर्व मालिक- इंडस सोर ऊर्जा प्राइवेट लिमिटेड- ने अप्रैल 2020 में जीएमआर समूह और डायल के पक्ष में एक पट्टा लिखा था। ओंकार इन्फोटेक की संपत्ति की खरीद के बाद, यह नया पट्टादाता बन गया। अप्रैल 2020 में, मुख्य घर सहित 2.45 एकड़ संपत्ति को डायल और अन्य जीएमआर सहयोगियों को 39.6 लाख रुपये के मासिक किराए पर पट्टे पर दिया गया था, जिसे बाद में संशोधित कर 45.6 लाख रुपये कर दिया गया था।
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2024 में, ओंकार इन्फोटेक ने रजिस्ट्री के जरिए से इंडस से पुष्पांजलि फार्म्स को 115 करोड़ रुपये में खरीद लिया। ओंकार इन्फोटेक ने संपत्ति का स्वामित्व मांगा और पट्टा समाप्त करने के लिए 15 दिन का नोटिस दिया।

हालांकि, डीआईएएल ने पुष्पांजलि संपत्ति को कृषि भूमि होने का दावा किया। इसके लिए पट्टे के पंजीकरण के लिए दिल्ली भूमि (हस्तांतरण पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1972 और दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम, 1954 के तहत संबंधित प्राधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी।

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