न्यायालय ने दूरसंचार एवं अन्य कंपनियों के निदेशकों, प्रबंध निदेशकों से पूछा कि एजीआर बकाए के भुगतान के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 17 मार्च तक बकाया जमा करने का आदेश भी दिया है। उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार विभाग के डेस्क अधिकारी के आदेश पर अफसोस जताया। आदेश में एजीआर मामले में दिए गए फैसले के अनुपालन पर रोक लगाई गई थी।
इस संदर्भ में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने कहा कि अगर एक डेस्क अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की धृष्टता करता है, तो उच्चतम न्यायालय को बंद कर दीजिए। कोर्ट ने कहा कि, 'हमने एजीआर मामले में समीक्षा याचिका खारिज कर दी, इसके बावजूद पैसा जमा नहीं किया गया। न्यायालय ने कहा कि देश में जिस तरह से चीजें हो रही हैं, इससे हमारी अंतरआत्मा हिल गई है।
दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है।
साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को टेलीकॉम कंपनियों से एजीआर के विवाद से संबंधित रकम वसूलने की इजाजत दे दी थी। इसके तहत कंपनियों को जुर्माने के साथ-साथ ब्याज भी चुकाना था। टेलीकॉम कंपनियों ने एजीआर चुकाने के लिए मोहलत मांगी थी। अंतिम तिथि 23 जनवरी 2020 थी, जो बीत चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि 'डेस्क अधिकारी' का नाम नहीं लिया है। मगर जिस अधिकारी को डांटा गया है, उनका नाम मंदर देशपांडे है। वह एक भारतीय अकाउंंटिंग व वित्तीय सेवा अधिकारी हैं। देशपांडे ने एक आदेश जारी कर कहा था कि एजीआर बकाया वसूलने के लिए टेलीकॉम कंपनियों से सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय तारीख के बीत जाने के बाद भी कोई वसूली नहीं की जाएगी। यह आदेश दूरसंचार विभाग में सदस्य (वित्त) की अनुमति के बाद ही जारी किया गया था। मगर इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना माना गया।