Supreme Court: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी करने वाले व्यक्ति को कथित तौर पर फर्जी चिकित्सा आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने 800 करोड़ रुपये की कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन के एक मामले में एंबियंस समूह के प्रमोटर राज सिंह गहलोत को गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा की अवधि गुरुवार को चार हफ्ते के लिए बढ़ा दी है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने न्यायमूर्ति बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी करने वाले व्यक्ति को कथित तौर पर फर्जी चिकित्सा आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'मुझे आश्चर्य है कि मामला दर्ज होने के बाद इन सभी आर्थिक अपराधियों को हमेशा अस्पताल में भर्ती क्यों कराया जाता है जबकि वे स्वस्थ हैं। पीठ में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल भी शामिल थे।
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गहलोत की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इन दलीलों का विरोध किया। रोहतगी ने कहा कि शीर्ष अदालत ने चार 04 नवंबर 2022 को गहलोत की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक की ओर से गठित मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि मेडिकल जांच पर इस अदालत के आदेश को निरर्थक नहीं बनाया जा सकता।
पीठ ने संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद गहलोत को गिरफ्तारी से संरक्षण की अवधि चार सप्ताह के लिए और बढ़ा दी और निचली अदालत को निर्देश दिया कि यदि इस अवधि के दौरान जमानत याचिका दायर की जाती है तो उस पर फैसला किया जाए।