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SBI Research: भारत के लिए जी-20 प्रेसीडेंसी कृषि सब्सिडी पर जारी मुद्दों को ठीक करने का सुनहरा मौका

Mon, 22 Aug 2022 01:55 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

SBI Research: भारत एक दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता करने वाला है। जी-20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं के तहत दुनिया की कुल जीडीपी का 85 प्रतिशत हिस्सा आता है। 
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जी-20 शिखर सम्मेलन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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जी 20 की अध्यक्षता मिलना भारत के लिए कृषि और खाद्य पदार्थों की सब्सिडी पर लंबे समय से जारी गतिरोध के मुद्दों को ठीक करने का एक सुनहरा अवसर है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक रिसर्च में इस बात का दावा किया गया है। बता दें कि भारत एक दिसंबर 2022 से 30 नवंबर 2023 तक जी-20 देशों के समूह की अध्यक्षता करने वाला है। जी-20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं के तहत दुनिया की कुल जीडीपी का 85 प्रतिशत हिस्सा आता है। 

वहीं, दुनिया के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 75% हिस्सा भी जी-20 देशों की अर्थव्यवस्था से ही आता है। इसके अंतर्गत दुनिया की दो तिहाई आबादी आती है। इन विशेषताओं के कारण यह दुनिया में आर्थिक सहयोग का सबसे प्रमुख मंच माना जाता है। 

एसबीआई की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर किसानों को सहारा देने की बात करें तो साल 2016 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में यह आंकड़ा 60,586 अमेरिकी डॉलर प्रति किसान है। जबकि ब्रिटेन में यह राशि 6,762 अमेरिकी डॉलर प्रति किसान है। कोरोना काल के बाद इसमें बड़ी बढ़ोतरी हुई है यह भी तय है।  यहां तक कि चीन में भी किसानों को भारत की तुलना में चार गुना ज्यादा सब्सिडी सपोर्ट मिलता है।  

रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्सिडी कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। विकसित देशों में किसानों को मिलने वाली भारी सब्सिडी वहां के किसानों को वैश्विक बाजार में कृषि उत्पादों के मामले में प्रतिस्पर्धात्मक रूप से अधिक मजबूत बनाते हैं।

भारत में किसानों को काेराना काल के दौरान की सबसे खराब स्थिति की बात करें तब भी महत 600 अमेरिकी डॉलर प्रति किसान की सब्सिडी ही मिल पाई। ऐसे में जी-20 देशों की अध्यक्षता काल में  भारत में कृषि सब्सिडी के आंकड़ों में सुधार के लिए विकसित और विकासशील देशों के समक्ष अपनी बात अधिक ठोस तरीके से रख पाएंगे।  

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