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एसबीआई की रिपोर्ट में दावा: डोनाल्ड ट्रंप फैक्टर से डॉलर मजबूत, अन्य मुद्राओं की तुलना में सबसे कम टूटा रुपया

Wed, 15 Jan 2025 06:01 AM IST
दीपक कुमार शर्मा कालीचरण, अमर उजाला

सार

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैक्टर का असर अल्पकालिक घटना है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप फैक्टर के कारण रुपये की तुलना में डॉलर मजबूत है। हालांकि, अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपया सबसे कम टूटा है। रिपोर्ट के मुताबिक रुपये में लगातार आ रही गिरावट जल्द थमेगी।
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डॉलर बनाम रुपया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डोनाल्ड ट्रंप के नवंबर, 2024 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और दुनियाभर की मुद्राओं में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है। रुपया भी नवंबर से अब तक तीन फीसदी टूटा है, लेकिन यह गिरावट अन्य मुद्राओं की तुलना में सबसे कम रही है। यानी ट्रंप फैक्टर के बावजूद दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपया स्थिर रहा है।

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एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये की गिरावट पर ट्रंप फैक्टर का असर एक अल्पकालिक घटना है। इस बात के तथ्यात्मक प्रमाण हैं कि आने वाले महीनों में भारतीय मुद्रा स्थिर हो जाएगी यानी ट्रंप फैक्टर का असर खत्म हो जाएगा। अमेरिकी डॉलर की मजबूत मांग के कारण 5 नवंबर, 2024 से 13 जनवरी, 2025 तक डॉलर सूचकांक में 6.4 फीसदी की तेजी आई है। इस अवधि में दक्षिण अफ्रीका की मुद्रा रैंड में सबसे ज्यादा 10.4 फीसदी की गिरावट आई है।

88 के करीब पहुंच सकती थी भारतीय मुद्रा
रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये में गिरावट को थामने के लिए आरबीआई ने तीन महीने में 70 अरब डॉलर की बिकवाली की है। सितंबर, 2024 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 705 अरब डॉलर के सार्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, जो अभी करीब 635 अरब डॉलर है।

  • एक अनुमान के मुताबिक, आरबीआई ने अगर बाजार में हस्तक्षेप नहीं किया होता तो नवंबर से अब तक रुपया करीब 4 फीसदी टूटकर 88 के करीब पहुंच सकता था।

क्या है टेपर टैंट्रम

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यह 2013 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बॉन्ड खरीद गतिविधियों में कमी की घोषणा के बाद आया एक वित्तीय घटनाक्रम है। इस घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव आया था। टेपर ट्रैंटम के दौरान बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई थी और उभरते बाजारों मुद्राओं में भी तेजी से गिरावट आई थी।

रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में रुपये का बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, रिचर्ड निक्सन युग से लेकर अब तक के अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल के विश्लेषण से पता चलता है कि डेमोक्रेटिक की तुलना में रिपब्लिकन प्रशासन के दौरान रुपये का प्रदर्शन अधिक स्थिर रहा है। हालांकि, मौजूदा अस्थिरता ‘टेपर टैंट्रम’ युग की तीव्रता को नहीं दर्शाती है। इससे यह धारणा मजबूत होती है कि रुपये के लिए ‘ट्रंप टैंट्रम’ एक क्षणिक घटना होगी। इसमें शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद भारतीय मुद्रा स्थिर हो जाएगी।

सरकार का कैश बैलेंस भी घटा
चालू वित्त वर्ष में 21 जून, 2024 तक सरकार के पास रिकॉर्ड 5.03 लाख करोड़ रुपये का कैश बैलेंस था, जो 6 दिसंबर, 2024 को घटकर 15,773 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, एडवांस टैक्स की वजह से सरकार का कैश बैलेंस 10 जनवरी, 2025 तक बढ़कर 2.69 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।  

नवंबर से विभिन्न मुद्राओं में गिरावट
मुद्रा गिरावट (%)
दक्षिण अफ्रीकन रैंड -10.4%
ब्राजीलियन रियाल -7.1%
ब्रिटिश पाउंड -6.9%
दक्षिण कोरियन वोन -6.6%
यूरो -6.4%
रूसी रूबल -5.2%
अर्जेंटीनियन पेसो -4.4%
इंडोनेशियन रुपियाह -4.3%
थाइलैंड बाट -4.0%
जापानी येन -3.9%
मलेशियाई रिंगित -3.9%
मेक्सिकन पेसो -3.3%
चाइनीज युआन -3.2%
भारतीय रुपया -3.0%
(इस अवधि में डॉलर सूचकांक 6.4 फीसदी मजबूत हुआ है)

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