कोरोना के बाद सरकार द्वारा शुरू की गई आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के कारण 14.6 लाख एमएसएमई बच गईं। अगर यह योजना नहीं होती तो यह कंपनियां डूब जातीं या बुरे फंसे कर्ज यानी एनपीए में चली जातीं। इससे 1.65 करोड़ परिवार बेरोजगार हो सकते थे। इस पूरी योजना से कुल 6.6 करोड़ लोगों की (अगर हर परिवार में चार सदस्य हैं) आजीविका बच गई।
2021-22 में 20 लाख करोड़ पहुंचा एमएसएमई का कर्ज
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र को लगातार बैंकों की ओर से कर्ज मिल रहा है। 2015-16 में जहां कुल कर्ज 12 लाख करोड़ रुपये था वह 2021-22 में 20 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। हालांकि, कोरोना में इस सेक्टर को जो भी नुकसान हुआ था, उससे अब कंपनियां उबर रही हैं। खासकर टेक्सटाइल्स, ट्रांसपोर्ट, मेटल, खाद्य तेल, केमिकल, कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसे क्षेत्र उबर चुके हैं।
-एसबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और जम्मू कश्मीर में ऐसी सैकड़ों कंपनियां हैं, जो मार्च, 2020 के कोरोना में प्रभावित नहीं हुईं और इनको पूरा कर्ज मिलता रहा। योजना का सबसे ज्यादा फायदा गुजरात की कंपनियों को मिला और फिर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उसके बाद उत्तर प्रदेश है।
-देश में कुल 6.3 करोड़ सूक्ष्म कंपनियां हैं जबकि 3.3 लाख छोटी और 0.01 लाख मध्यम कंपनियां हैं। इसमें से गांवों में 3.25 करोड़ और शहरों में 3.09 करोड़ उद्योग हैं।