वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के लागू हुए 8 साल पूरे हो गए हैं। इस दौरान सक्रिय करदाताओं की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, लेकिन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने वाले बाकी बड़े राज्यों का हिस्सा काफी कम है। खास बात है कि पंजीकृत हर पांच करदाताओं में एक महिला शामिल है।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था में 8.4 फीसदी योगदान देने वाले यूपी में कुल 20.08 लाख या 13.2 फीसदी सक्रिय करदाता हैं। लेकिन, बाकी बड़े राज्यों का हाल इसके उलट है। तमिलनाडु अर्थव्यवस्था में 8.9 फीसदी योगदान देता है, जबकि राज्य में सक्रिय जीएसटी करदाताओं में हिस्सेदारी 7.7 फीसदी है। कर्नाटक अर्थव्यवस्था में 8.4 फीसदी योगदान देता है, जबकि सक्रिय करदाताओं का हिस्सा 6.9 फीसदी है। वहीं, तेलंगाना में सक्रिय करदाताओं की हिस्सेदारी 3.6 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 2.8 फीसदी के स्तर पर है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों की कुल जीएसटी करदाताओं में हिस्सेदारी उनकी जीडीपी की तुलना में अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में जीएसटी करदाताओं की संख्या बढ़ने की अपार संभावनाएं है।
एलएलपी कंपनियों में अधिक महिलाएं
पंजीकृत करदाताओं में से 14 फीसदी जो करदाता हैं, उन सभी में महिला सदस्य है। खासकर लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) और निजी लिमिटेड कंपनियों में काफी अधिक संख्या में महिलाएं हैं। प्रोपराइटर कंपनियों में 16.7 फीसदी में एक महिला सदस्य या सभी सदस्य महिला हैं। भागीदारी वाली कंपनियों में से 41.9 फीसदी में एक महिला सदस्य और 5.3 फीसदी में सभी सदस्य महिलाएं हैं। प्राइवेट लिमिटेड वाली कंपनियों में 46.8 फीसदी में एक महिला सदस्य है।
प्रोपराइटरशिप कंपनियों का हिस्सा 77.6 फीसदी
जीएसटी में पंजीकृत करदाताओं में प्रोपराइटरशिप कंपनियों का हिस्सा सबसे अधिक 77.6 फीसदी (1.17 करोड़) है। भागीदारी वाली कंपनियों का हिस्सा 9.7 फीसदी और प्राइवेट लिमिटेड का 6.8 फीसदी है। सरकारी विभागों की हिस्सेदारी 1.3 फीसदी और लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप का हिस्सा 1.1 फीसदी है।
शीर्ष-5 राज्यों में हैं 50 फीसदी करदाता
इस समय कुल 1.52 करोड़ से अधिक सक्रिय जीएसटी पंजीकरण हैं। शीर्ष-5 राज्यों में कुल सक्रिय जीएसटी करदाताओं का लगभग 50 फीसदी हिस्सा है। इनका कुल राजस्व में 41 फीसदी योगदान है। जीएसटी में सामान्य करदाताओं की संख्या 1.33 करोड़ के साथ सबसे अधिक है। छह राज्यों ने एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। केवल पांच वर्षों में (वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25) सकल जीएसटी संग्रह दोगुना हो गया। औसत मासिक सकल जीएसटी संग्रह लगभग 2 लाख करोड़ रुपये है।
यूपीआई लेनदेन में आक्रामक जांच से छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी प्रवर्तन को संवेदनशीलता के साथ संतुलित किया जाना चाहिए, क्योंकि यूपीआई लेनदेन पर आक्रामक जांच छोटे व्यवसायों को अनौपचारिक नकदी आधारित अर्थव्यवस्था में वापस ला सकती है। कर्नाटक में छोटे व्यापारी जीएसटी नोटिस के कारण नकद लेनदेन को प्राथमिकता दे रहे हैं। अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था की दीर्घकालिक सफलता छोटे व्यापारियों को दंडित करने के बजाय उनके सशक्तिकरण पर निर्भर करेगी।
यूपी टैक्स वसूली में हरियाणा से भी पीछे
राज्य संग्रह (2024-25)
महाराष्ट्र 3,60,000 करोड़
कर्नाटक 1,59,000 करोड़
गुजरात 1,37,000 करोड़
तमिलनाडु 1,31,000 करोड़
हरियाणा 1,19,000 करोड़
उत्तर प्रदेश 1,12,000 करोड़