खस्ताहाल वित्तीय हालत से जूझ रही जेट एयरवेज को खरीदने के लिए बैंकों के कंशोर्सियम ने निविदाएं स्वीकार करना शुरू कर दिया है। छह अप्रैल से शुरू होकर के नौ अप्रैल तक चलेगी। हालांकि एसबीआई सहित बैंकों के कंशोर्सियम ने खरीदार नहीं मिलने की स्थिति में एक प्लान बी भी तैयार कर रखा है। फिलहाल विदेशी कंपनियों के अलावा कुछ भारतीय कंपनियों ने भी इसमें हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है।
राष्ट्रीय निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईफ) ने जेट एयरवेज में 1900 करोड़ रुपये का निवेश करने पर अपनी सहमति जताई है। जेट के पास इतनी अचल संपत्ति भी नहीं है कि उसको दिवालिया प्रक्रिया के तहत ले जाया जाए। इसके साथ में निजी निवेश कंपनी टीपीजी और इंडिगो पार्टनर भी बोली में भाग ले सकते हैं। वहीं विदेशी एयरलाइन कंपनियां डेल्टा और एयर फ्रांस के साथ भी बातचीत चल रही है।
अगर बोलीदाताओं की निविदा तय वक्त तक नहीं आई तो फिर बैंकों ने एक प्लान बी भी तैयार किया है। इसके तहत जेट एयरवेज में इतना निवेश किया जाएगा ताकि यह अगले छह महीने तक बिना किसी दिक्कत के चलता रहे। इसके साथ ही जेट एयरवेज के बोर्ड में विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाएगा। बैंक फिर एक समय सीमा के अंदर कंपनी की हालत सही करने पर काम करेंगे ताकि परिचालन में कोई दिक्कत पैदा न हो।
विगत कुछ महीने से जेट एयरवेज की हालत दिन पर दिन पतली होती जा रही है। जेट एयरवेज में फिलहाल सीधे तौर पर 16 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी की गिरती हालत का असर इन कर्मचारियों के परिवार पर भी पड़ रहा है। इसके साथ ही देश के विमानन क्षेत्र पर इस कंपनी की हालत पर नजर रखी जा रही है।
चुनाव के वक्त केंद्र सरकार का भी जेट एयरवेज को डूबने से बचाना जरूरी है, क्योंकि इसका दूरगामी असर भविष्य में देखने को मिल सकता है। अगर आप जेट एयरवेज से संबंधित कुछ और जानना चाहते हैं तो हमको बताएं, हम वो खबरें भी आपके सामने रखेंगे।