भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 2.69 लाख करोड़ रुपये के बंपर लाभांश से सरकार की राजकोषीय स्थिति बेहतर हो सकेगी। साथ ही, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वृद्धि को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। एसबीआई ने इकोरैप रिपोर्ट में कहा, हमारा अनुमान है कि बंपर लाभांश से राजकोषीय घाटा बजट स्तर से 0.2 फीसदी कम होकर जीडीपी का 4.2 फीसदी रहेगा। यह वैकल्पिक रूप से करीब 70,000 करोड़ के अतिरिक्त खर्च का रास्ता भी खोलेगा, जबकि अन्य चीजों में कोई बदलाव नहीं होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025-26 के बजट में 2.56 लाख करोड़ का लाभांश मिलने का अनुमान लगाया था।
आरबीआई विदेशी मुद्रा भंडार का शीर्ष विक्रेता
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अधिशेष भुगतान मजबूत सकल डॉलर की बिक्री, उच्च विदेशी मुद्रा लाभ और ब्याज आय में लगातार वृद्धि की वजह से है। आरबीआई जनवरी में एशिया के अन्य केंद्रीय बैंकों की तुलना में विदेशी मुद्रा भंडार का शीर्ष विक्रेता था। सितंबर, 2024 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 704 अरब डॉलर के शिखर पर पहुंच गया था।
सरकार बुनियादी ढांचे पर बढ़ा सकती है अपना खर्च
- आरबीआई से बंपर लाभांश मिलने से सरकार बुनियादी ढांचे पर अपना खर्च बढ़ा सकती है।
- लाभांश से सरकार का राजस्व बढ़ेगा, जिससे उसे खर्च करने के लिए ज्यादा उधारी नहीं लेनी पड़ेगी।
- अगर सरकार अपनी उधारी कम नहीं करती है, तो इस पैसे का इस्तेमाल कल्याणाकारी योजनाओं और सरकारी सब्सिडी पर खर्च करने में किया जा सकता है।
चालू वित्त वर्ष में अच्छी रहेगी नकदी की स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में टिकाऊ नकदी की स्थिति अधिशेष में रहने की उम्मीद है। इसमें खुले बाजार परिचालन (ओएमओ) की खरीद, आरबीआई के लाभांश हस्तांतरण और 2025-26 में 25-30 अरब डॉलर के भुगतान संतुलन (बीओपी) अधिशेष से समर्थन मिलेगा।