भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा रेहड़ी पटरी वाले हैं, जो देश की कुल संख्या के मुकाबले एक चौथाई हैं।
सरकार ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन से प्रभावित रेहड़ी पटरी वालों के लिए 5,000 करोड़ रुपये की विशेष ऋण सुविधा का एलान किया है। इसके एक दिन बाद जारी टिप्पणी के मुताबिक दस राज्यों में 35 लाख से 50 लाख रेहड़ी पटरी वालों को इस योजना से फायदा होगा। उन्हें अपना व्यापार फिर शुरू करने के लिए 10,000 रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा।
इन राज्यों में इतने हैं रेहड़ी पटरी वाले
एसबीआई की टिप्पणी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 7.8 लाख रेहड़ी पटरी वाले हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या 5.5 लाख है। देश के कुल रेहड़ी पटरी वालों में दोनों राज्यों की सामूहिक हिस्सेदारी 27 फीसदी है।
इसके मुताबिक बिहार में 5.3 लाख रेहड़ी पटरी वाले, राजस्थान में 3.1 लाख, महाराष्ट्र में 2.9 लाख, तमिलनाडु में 2.8 लाख, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 2.1 लाख, गुजरात में दो लाख, केरल और असम में 1.9 लाख, ओडिशा में 1.7 लाख, हरियाणा में 1.5 लाख और मध्य प्रदेश तथा पंजाब में 1.4 लाख रेहड़ी पटरी वाले हैं। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि उनके अनुमान आवधिक श्रम बल सर्वेक्षणों से गैर-कृषि क्षेत्र में स्व-रोजगार के आंकड़ों पर आधारित हैं।
आज होगा तीसरी किस्त का एलान
जानलेवा महामारी कोरोना वायरस से पूरे देश की रफ्तार थमी हुई है। आम आदमी से लेकर अर्थव्यवस्था तक संकट के साये में है। ऐसे में लगातार नीचे जा रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को इसकी पहली किस्त का ब्योरा दिया था और गुरुवार को वह इसकी दूसरी किस्त के बारे में बताया, जिसमें किसान, मजदूर, गरीब, रेहड़ी पटरी वाले, एमएसएमई सहित कई क्षेत्रों को राहत दी गई। आज वित्त मंत्री तीसरी किस्त का एलान करेंगी।