सऊदी अरब में सरकार के रेगिस्तान में दूध उत्पादन करना किसी अचंभे से कम नहीं। सऊदी अरब के रेगिस्तान में एक दूध डेयरी चलाने के लिए एक लाख अस्सी हजार गाएं, ठंडे शेड्स, पंप से भूमिगत जल निकालना, खाना अर्जेंटीना और दूध को ठंडा रखने के लिए रेफ्रिजेरेशन सिस्टम की जरूरत पड़ती है।
यही नहीं दूध को जगह-जगह पहुंचाने के लिए करीब 9000 गाड़ियों की जरूरत पड़ती है। किंग सलमान के सबसे करीबी बेटे और डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस डेयरी अल्माराय के संचालक हैं। वह इस डेयरी के जरिए दुनिया को बताना चाहते हैं कि किस प्रकार सऊदी अरब तेल पर से अपनी निर्भरता को कम कर रहा है।
तेल से कोई सीधा नाता न होते हुए भी अल्माराय सऊदी सरकार पर सस्ते ईधन आपूर्ति के लिए निर्भर है। हालांकि अब ये निर्भरता कुछ हद तक कम हो रही है। क्योंकि वैश्विक बाजार में तेल की गिरती कीमतों और यमन में जारी लड़ाई के कारण सऊदी अरब का बजट हिल गया है।
सरकार ने सब्सिडी में कटौती
अल्माराय डेयरी
इस कारण सऊदी सरकार को जनता पर खर्च की जाने वाली रकम, सब्सिडी, सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों में कटौती करनी पड़ रही है। साथ ही सरकार के इन फैसलों से जनता को गहरा झटका लगा है, जो अबतक सरकारी सब्सिडियों का लाभ उठाते रहे हैं।
जहां तक अल्माराय की बात है इसकी वैल्यू 133 मिलियन डॉलर के करीब है। सरकार के बदलाव लाने के फैसले से कारोबार और जनता का आराम पूर्वक रहना देश में कठिन हो गया है। यह कहना है कारोबारी लामा अलसुलेमान का । सोशल कांट्रेक्ट में बदलाव 31 वर्षीय डिप्टी क्राउन प्रिंस के लिए खतरा मोल लेने के बराबर है।
जनता देखना चाहती है कि वह इस बदलाव से क्या परिवर्तन लाते हैं। अगर वो इसमें सफल होते हैं तो वह किंग होंगे नहीं तो वह हार जाएंगे,यह कहना है इब्राहिम अलनाहस का जो पोलिटिकल साइंस के प्रोफेसर हैं। सऊदी सरकार के ओपेक की बैठक के दौरान तेल उत्पादन में कटौती कर क्रूड के दाम बढ़ाने पर सहमति इस का बात का सूचक है कि सऊदी सरकार को इसकी कितनी आवश्यकता है। निवेश राशि में कमी लाने के लिए डिप्टी क्राउन प्रिंस ने सऊदी ज्वेल अरामको का कुछ हिस्सा बेचने का प्लान बनाया है।
सऊदी को रिवैल्यू करने की जरूरत
अल्माराय डेयरी
तेल कीमतों में गिरावट से पिछले साल सरकार का बजट घाटा 100 बिलियन डॉलर रहा था। इसके अलावा विदेश में देश के निवेश में चौथाही कमी देखी जा रही है। साथ ही सऊदी सरकार ने विदेशी बैंकों से कर्ज ले रखा है और बॉंड के जरिए भी वह और धन इकट्ठा करने की सोच रही है।
हेड्ज फंड्स का कहना है कि सऊदी सरकार को अपनी करेंसी रियाल को फिर से रिवैल्यू करनी चाहिए। सऊदी सरकार ने देश में निर्माण कार्यों में कमी कर दी है और विदेशी मजदूरों को वापस भेजने का कंपनियों पर दबाव बना रही है।
इस वजह से मजदूरों ने वेतन न मिलने पर विरोध जताते हुए कुछ बसों को आग के हवाले कर दिया था। इसके अलावा पानी के बिल में बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण जनता में हाहाकार मच गया। जनता ने सोशल मीडिया पर विरोध किया तो जल संसाधन मंत्री ने गुस्से में कह डाला कि इस व्यवस्था से ऐतराज है तो खुद कुआं खोद लिजिए।