केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने बुधवार को विदेशी अंशदान (नियमन) अधिनियम (FCRA) के कथित उल्लंघन से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वास्तव में कोई अनियमितता हुई होती तो अब तक उनके खिलाफ मामला क्यों दर्ज नहीं किया गया।
सतीशन का दावा- एफसीआरए का उल्लंघन नहीं हुआ
सतीशन ने कहा कि सतर्कता विभाग ने भी यह स्पष्ट किया है कि एफसीआरए का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ गलत था तो केस क्यों नहीं दर्ज हुआ? बिना प्राथमिकी के मामले को सीबीआई को भेजने की बात कैसे की जा सकती है? मैं इसे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौती दूंगा।
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वीएसीबी ने क्या किया था दावा?
इससे पहले दिन में सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (वीएसीबी) ने दावा किया था कि सतीशन की यूके यात्रा कथित तौर पर केरल बाढ़ पुनर्वास परियोजना पुनर्जनी के लिए विदेश से धन जुटाने की एक सुनियोजित कवायद थी, जो FCRA के प्रावधानों का उल्लंघन है। सतर्कता विभाग के अनुसार, 2018 की केरल बाढ़ के बाद शुरू की गई इस परियोजना का नाम 'पुनर्जनी: परवूर के लिए नया जीवन' रखा गया था और इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मनप्पट फाउंडेशन के चेयरमैन अमीर अहमद को सौंपी गई थी।
क्या है मामला?
जांच में यह भी सामने आया कि सतीशन ने अपनी यूके यात्रा के लिए केरल विधानसभा सचिव से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और केंद्रीय गृह मंत्रालय से राजनीतिक मंजूरी प्राप्त की थी। हालांकि, केंद्र द्वारा दी गई मंजूरी में यात्रा का उद्देश्य निजी बताया गया था, जिसमें मित्रों से मिलना और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण शामिल था। मंजूरी पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यह निजी यात्रा है और इसमें विदेश स्थित भारतीय मिशन की कोई भूमिका नहीं होगी।
वीएसीबी का आरोप है कि इसी निजी यात्रा की अनुमति का दुरुपयोग करते हुए सतीशन ने यूके में फंडरेजिंग गतिविधियों में हिस्सा लिया। सतर्कता विभाग का कहना है कि सोशल मीडिया से प्राप्त वीडियो साक्ष्यों में सतीशन को यूके में प्रवासी केरलवासियों के लिए आयोजित एक फंडरेजिंग कार्यक्रम में शामिल होते देखा गया है, जहां कथित तौर पर उन्होंने ‘पुनर्जनी’ परियोजना के लिए प्रति व्यक्ति 500 पाउंड का योगदान देने की अपील की। इस पूरे मामले को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।