लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रहे सहारा समूह ने अगले साल तक इसके समाप्त होने का विश्वास व्यक्त किया है। समूह की मानें तो कुछ नए क्षेत्रों में कारोबार शुरू किया गया है। जिससे समूह को काफी उम्मीद है। नए व्यवसाय से समूह को भारतीय उद्योग जगत में फिर से प्रतिष्ठा मिलेगी।
समूह ने अपनी वित्तीय स्थिति पर मीडिया में विस्तार से एक विज्ञापन दिया है जिसमें उसने पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सेबी के पास 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराने का हवाला देते हुए कहा है कि यह राशि का ब्याज भी नियामक के पास जमा है। जिसका कोई उपयोग भी नहीं किया गया। पिछले पांच सालों में इनमें से निवेशकों को 91 करोड़ रुपए ही दिए गए। इसके पीछे की वजह यह हो सकती है कि कंपनी पहले ही अपने ज्यादातर निवेशकों का भुगतान कर चुकी है। समूह ने जोर देकर कहा कि निवेशकों के पुनभुर्गतान संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सेबी-सहारा के खाते में पड़ा पैसा उसे वापस मिल जाएगा।
समूह ने कहा कि उस पर किसी भी तरीक से राशि जुटाने पर प्रतिबंध लगा है। संपत्तियों की बिक्री से जो धन मिल रहा है वह सीधे सेबी-सहारा के खाते में चला जाता है। इसकी एक भी रकम समूह की जरूरतों के लिए उपयोग में नहीं लाई गई है। ऐसे प्रतिबंध के बाद समूह का काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।