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वृद्धि दर: एसएंडपी ने बढ़ाया भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, FY27 में 7% की रफ्तार; आरबीआई के रुख पर भी संकेत

Wed, 23 Sep 2026 10:34 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7% किया है। जानिए आरबीआई की संभावित 25 बीपीएस दर बढ़ोतरी, महंगाई और मानसून के जोखिमों का अर्थव्यवस्था पर असर के बारे में।
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भारतीय अर्थव्यवस्था - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की शुरुआत उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन के साथ की है। अब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने FY27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। इसके साथ ही रेटिंग एजेंसी ने महंगाई और आर्थिक जोखिमों को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में आरबीआई की पॉलिसी रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है। यानी एक तरफ अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत दिख रही है, तो दूसरी तरफ महंगाई और मौसम से जुड़ी चिंताएं ब्याज दरों के मोर्चे पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

एसएंडपी ने जीडीजी ग्रोथ का अनुमान क्यों बढ़ाया?

एसएंडपी के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में कई ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने विकास दर के अनुमान को ऊपर ले जाने में मदद की है। जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8% बढ़ी, जो उम्मीद से बेहतर रही।

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इसके पीछे मुख्य रूप से ये कारण रहे-

  • औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती
  • घरेलू खपत में अच्छी वृद्धि
  • वस्तुओं के निर्यात में मजबूती
  • सरकारी निवेश में तेजी

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए एसएंडपी ने FY27 की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है।

क्या पूरी FY27 में 7% की रफ्तार बनी रहेगी?

एसएंडपी का मानना है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में विकास की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है। इसकी एक वजह जीएसटी के युक्तिकरण और आयकर कटौती से मिलने वाला शुरुआती फायदा कम होना है।

इसका मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था के लिए मौजूदा सकारात्मक परिस्थितियां आगे भी बनी रहना जरूरी होगा, ताकि 7% की सालाना वृद्धि का अनुमान हासिल किया जा सके।

आरबीआई ब्याज दर क्यों बढ़ा सकता है?

एसएंडपी के अनुसार अब परिस्थितियां ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में जा सकती हैं। रेटिंग एजेंसी ने इसके पीछे कई कारण गिनाए हैं। सबसे अहम वजह महंगाई का दबाव है। S&P ने FY27 में भारत की औसत उपभोक्ता महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान लगाया है।

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इसके अलावा मजबूत आर्थिक वृद्धि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मौसम से जुड़े जोखिम भी ब्याज दरों के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। एसएंडपी का अनुमान है कि आरबीआई चालू वित्त वर्ष में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि कर सकता है।

कमजोर मानसून से कितना खतरा है?

मौसम और मानसून को लेकर भी S&P ने सावधानी बरतने की बात कही है। 9 सितंबर 2026 तक देश में संचयी बारिश सामान्य से 15% कम रही थी। कम बारिश का असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है। अगर खाद्य उत्पादन प्रभावित होता है, तो इससे खाद्य महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि एसएंडपी ने कृषि उत्पादन और खाद्य महंगाई को आगे के लिए महत्वपूर्ण वेरिएबल्स बताया है।

भारत की ग्रोथ पर दूसरी एजेंसियों का क्या अनुमान है?

भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर दूसरी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों के अनुमान भी सामने आए हैं। पिछले सप्ताह मूडीज ने भी FY27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7% किया था। वहीं, अलग-अलग अनुमानों में अंतर भी है- 

  • एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स: 7%
  • मूडीज: 7%
  • आरबीआई: 6.7%
  • फिच रेटिंग्स: 6.4%

एसएंडपी के अनुसार 7% की वृद्धि दर का अनुमान भारत को सभी जी20 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर वाले देशों में रखता है।

आगे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या महत्वपूर्ण रहेगा?

भारत की अर्थव्यवस्था ने 2025-26 में 7.8% की वृद्धि दर्ज की थी। अब FY27 में 7% की वृद्धि का अनुमान मजबूत आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। हालांकि दूसरी छमाही में जीएसटी और आयकर उपायों का असर कम होने, मानसून, कृषि उत्पादन, खाद्य महंगाई और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर नजर रहेगी। यानी भारत के विकास की कहानी फिलहाल मजबूत है, लेकिन आगे की रफ्तार के लिए महंगाई और मौसम सबसे अहम चुनौतियों में शामिल रहेंगे।

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