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S&P: भारत की सरकारी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की मजबूत वृद्धि की उम्मीद, एसएंडपी की रिपोर्ट में दावा

Mon, 26 May 2025 05:07 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

S&P:  एसएंडपी की रिपोर्ट के अनुसार भारत की गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं का दबदबा आने वाले समय में मजबूत होने वाला है। उम्मीद है कि अगले दो सालों में वित्तीय जीआरई के लिए ऋण वृद्धि लगभग 15 प्रतिशत प्रति वर्ष रहेगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाएं आने वाले समय में मजबूत वृद्धि करने वाली हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के भविष्य को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार इन संस्थाओं के आने वाले वर्षों में बाजार में अधिक हिस्सेदारी करने की उम्मीद है। एसएंडपी रेटिंग्स की 'भारतीय सरकार के स्वामित्व वाली वित्तीय संस्थाएं: तीव्र गति से आगे' की रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक विकास को समर्थन देने में इन संस्थाओं की भूमिका से उनकी फ्रेंचाइची मजबूत होंगी।  

ऋण वृद्धि 15% रहने की उम्मीद 

भारत के वित्तीय क्षेत्र में सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं का दबदबा है। कई सरकारी स्वामित्व वाली गैर बैंकिंग संस्थाएं राष्ट्र हित के लिए काम करती हैं। रिपोर्ट में  बताया गया कि उम्मीद है कि अगले दो सालों में वित्तीय जीआरई के लिए ऋण वृद्धि लगभग 15 प्रतिशत प्रति वर्ष रहेगी। नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमंट (एनएबीएफआईडी) और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड( आईआरईडीए) जैसी संस्थाओं में अधिक वृद्धि की उम्मीद है। दोनों के निम्न आधार से अपने कारोबार को बढ़ाने की संभावना है।"सरकार-संबंधित इकाई" (जीआरई) किसी भी संगठन को संदर्भित करता है जिसका सरकार के साथ महत्वपूर्ण संबंध होता है, चाहे वह स्वामित्व, नियंत्रण या समर्थन हो।

विश्लेषकों की क्या है राय?

विश्लेषक दीपाली सेठ छाबड़िया ने कहा कि वित्तीय सेवाएं भारत की चार रणनीतिक क्षेत्रों में से एक है। इसलिए, इस क्षेत्र में सरकार से जुड़े संस्थाओं को सरकार के समर्थन से लाभान्वित होने की संभावना अधिक है। सरकार इन संस्थानों को वित्तीय स्थिरता और विकास में मदद करती है। 

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विश्लेषक गीत चुघ के अनुसार इस क्षेत्र के लिए ऋण लागत में सुधार हुआ है। यह प्रतिस्पर्धियों की तुलना में औरों से बेहतर है। हालांकि, अनुमान है कि इस क्षेत्र के ऋण लागत में वृद्धि होगी क्योंकि ऋण का मौसम है और वसूली कम हो रही है। साथ ही,  पिछले वर्षों में किए गए अतिरिक्त प्रावधानों का लाभ समाप्त हो रहा है। 

भारत की दो संस्थाओं को मिली जीआरई रेटिंग 

विकास वित्तीय संस्थाओं का आय सामान्य रहता है। इसमें लघु उद्योगों (सिडबी), कृषि (नाबार्ड) और आवास (एनएचबी) शामिल हैं। इसमें कहा गया कि एसएंडपी ने भारत में  वित्तीय संस्थाओं को जीआरई रेटिंग दी है। उनमें भारतीय रेलवे वित्त निगम और भारतीय निर्यात-आयात बैंक शामिल है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि पावर फारनेंस कॉर्प, आरईसी और आईआरईडीए अपेक्षाकृत कमजोर उधारकर्ताओं को ऋण देकर उच्च मार्जिन कमाते हैं।

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