Oil Import from Russia : आंकड़ों से पता चलता है कि रूस पहली बार इराक को पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा, जिससे सऊदी अरब पिछले वित्त वर्ष में नंबर 3 पर आ गया। ओपेक का हिस्सा सिकुड़ा है क्योंकि भारत, जिसने अतीत में शायद ही कभी उच्च माल ढुलाई लागत के कारण रूसी तेल खरीदा था।
रूस से तेल की खरीदारी बढ़ने से ओपीईसी देशों से भारत का कच्चे तेल का आयात 22 वर्षों के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस साल ओपीईसी देशों से तेल आयात में और कमी आ सकती है। पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यातक संगठन ओपीईसी में मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देश शामिल हैं। मार्च 2023 को समाप्त वित्तीय वर्ष में ओपीईसी देशों से भारत का तेल आयात 59% रहा, जो वित्तीय वर्ष 2021-22 में 72% था।
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आंकड़ों से पता चलता है कि रूस पहली बार इराक को पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा, जिससे सऊदी अरब पिछले वित्त वर्ष में नंबर 3 पर आ गया। ओपेक का हिस्सा सिकुड़ा है क्योंकि भारत, जिसने अतीत में शायद ही कभी उच्च माल ढुलाई लागत के कारण रूसी तेल खरीदा था, अब रूसी समुद्री तेल के लिए रूस का शीर्ष ग्राहक है। बता दें कि फरवरी 2022 में यूक्रेन और रूस के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल की खरीदारी पर पाबंदी लगा दी थी। भारत ने वर्ष 2022-23 में रूस से 1.6 मिलियन बैरल तेल की हर दिन खरीदारी की, जो कि देश के कुल तेल आयात 4.65 मिलियन बीपीडी (बैरल प्रति दिन) का करीब 23 प्रतिशत है।