अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों के कारण नवंबर में रूसी तेल निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने बताया कि प्रतिबंधों की चिंताओं की वजह से खरीदारों पर दबाव पड़ा।
एजेंसी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नवंबर में रूसी तेल निर्यात में 420 किलो बैरल प्रति दिन (केबी/डी) की गिरावट आई। कम शिपमेंट और कमजोर कीमतों के संयोजन ने मॉस्को के तेल राजस्व को घटाकर 11 अरब डॉलर कर दिया, जो एक साल पहले की तुलना में 3.6 अरब डॉलर कम है।
आईईए ने कहा कि रूस का कुल तेल निर्यात नवंबर में लगभग 400 किलो बैरल प्रति दिन घटकर 6.9 माइक्रोमीटर प्रति दिन हो गया, क्योंकि खरीदारों ने अधिक कड़े प्रतिबंधों से जुड़े प्रभावों और जोखिमों का आकलन किया। निर्यात में गिरावट के कारण यूराल कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी गिरावट आई, जो 8.2 डॉलर/बैरल (बैरल का अर्थ लगभग 159 लीटर) गिरकर 43.52 डॉलर/बैरल हो गई। इससे निर्यात राजस्व फरवरी 2022 में यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
बता दें कि अमेरिका ने कई देशों को चेतावनी दी है कि अगर वे रूसी तेल खरीदना जारी रखते हैं तो उन्हें अतिरिक्त शुल्क और दंडात्मक व्यापार उपायों का सामना करना पड़ सकता है। रूस से तेल की निरंतर खरीद का हवाला देते हुए, अमेरिका ने भारत से आयात पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पहले घोषित 25 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त है।
आईईए के अनुसार, नवंबर में वैश्विक तेल आपूर्ति में 610 किलो बैरल प्रति दिन की गिरावट आई, जिससे सितंबर के रिकॉर्ड 109 मिलियन बैरल प्रति दिन (एमबीसी) से संचयी गिरावट बढ़कर 1.5 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतिबंधों से प्रभावित रूस और वेनेजुएला में आपूर्ति में व्यवधान के कारण हुई कुल गिरावट में ओपेक + देशों का योगदान तीन-चौथाई से अधिक रहा। इस समूह ने पिछले दो महीनों में आपूर्ति में आई गिरावट में 80 प्रतिशत का योगदान दिया, जो कुवैत और कजाकिस्तान में हुई बड़ी अनियोजित रुकावटों के साथ-साथ रूस और वेनेजुएला में जारी संकुचन को दर्शाता है।
हालिया तंगी के बावजूद, आईईए ने कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति में 2025 में 3 मिलियन बैरल प्रति दिन और 2026 में 2.4 मिलियन बैरल प्रति दिन की वृद्धि होने की उम्मीद है। एजेंसी ने 2026 के लिए अपनी मांग के अनुमान को भी बढ़ाकर 860 केबी/दिन कर दिया है, जो उसके पहले के अनुमान से 90 केबी/दिन अधिक है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वर्ष मांग में होने वाली वृद्धि का आधा हिस्सा गैसोल और जेट/केरोसिन से आएगा, जबकि बिजली उत्पादन में प्राकृतिक गैस और सौर ऊर्जा के प्रतिस्थापन के कारण ईंधन तेल की मांग लगातार कम हो रही है। इस बीच, आईईए ने बताया कि रिफाइनरी में कामकाज ठप होने और रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों पर यूरोपीय संघ द्वारा लगाए जाने वाले आगामी प्रतिबंधों के कारण नवंबर में उत्पाद क्रैक और रिफाइनिंग मार्जिन तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं।
यूरोपीय थिंक टैंक के अनुसार, नवंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 4 प्रतिशत बढ़कर पांच महीने के उच्चतम स्तर 2.6 अरब यूरो पर पहुंच गया, जिसमें उत्पादित परिष्कृत ईंधन का एक बड़ा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया को निर्यात किया गया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अनुसार, नवंबर में भारत चीन के बाद रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। इसने अक्तूबर में रूसी तेल खरीदने पर 2.5 अरब यूरो खर्च किए थे।
सीआरईए ने कहा कि भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में महीने-दर-महीने 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पांच महीनों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जबकि कुल आयात मात्रा स्थिर बनी हुई है। भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में महीने-दर-महीने 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पांच महीनों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जबकि कुल आयात मात्रा स्थिर बनी हुई है।