विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये ने मंगलवार को अब तक का सबसे निचला स्तर छू लिया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 23 पैसे की भारी गिरावट के साथ 91.01 (अनंतिम) के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान स्थानीय मुद्रा एक समय 36 पैसे टूटकर 91.14 के स्तर तक लुढ़क गई थी, हालांकि बाद में इसमें मामूली सुधार देखा गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी रुपये को सहारा देने में नाकाम रही, क्योंकि बाजार में डॉलर की मांग और विदेशी फंडों की निकासी का दबाव अधिक था।
मिराए एसेट वरिष्ठ फंड मैनेजर बसंत बाफना ने बताया कि रुपये में जो गिरावट आ रही है, वो टैरिफ से जुड़ी चिंताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की वजह से है। जब तक यह अल्पकालिक असंतुलन बने रहेंगे रुपये पर यह दबाव जारी रह सकता है। वहीं विदेशी निवेशकों ने इस साल अभी तक 18 अरब डॉलर से अधिक से भारतीय बाजार निकासी की है। रुपये की गिरावट से विदेशी निवेशकों के आकर्षण घटा दिया है, जिसकी वजह से बिकवाली जारी है। फॉरेक्स एडवाइजरी फर्म सीआर फॉरेक्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी ने कहा, रुपये की कमजोरी मुख्य रूप से टैरिफ संबंधी चिंताओं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण है।
बसंत ने बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता में देरी की वजह से भी रुपये में गिरावट देखने को मिल रही है। हमें उम्मीद है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द ही होगा, दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक बनी हुई है। भारत के प्रधनामंत्री और अमेरिका के राष्ट्रपति ने फोन पर बातचीत भी की है, जो वार्ता को आगे ले जाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाएगी। समझौता होने के साथ ही इक्विटी निवेशकों की अनिश्चितता कम होने में मदद मिलेगी और रुपये में अप्रत्याशित उछाल आ सकता है।
कमोडिटी विशेषज्ञ मोहन छेड़ा बताते हैं, सोने और चांदी की कीमतें बढ़ रही हैं क्योंकि अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपये दोनों पर भारी बिकवाली का दबाव है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक हाल ही में 98 से नीचे फिसल गया और इस स्तर से नीचे बना हुआ है, जबकि भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे भारत और विदेशों दोनों में सोने और चांदी की मांग बढ़ी है।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ, वीके विजयकुमार बताते हैं, रुपये में मंगवलार को गिरावट की उम्मीद कम थी, क्योंकि नवंबर का व्यापारी आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए है, मुझे लगता है कि शॉर्ट पोजिशन कवर करना आज की गिरावट का एक कारण हो सकता है। एफआईआई की बिकवाली एक बुरे चक्र की तरह काम कर रही है जो रुपये में लगातार गिरावट ला रही है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च विशेषज्ञ दिलीप परमार कहते हैं, विदेशी फंड के आउटफ्लो और लगातार रिस्क से बचने की आदत से लगातार नीचे की ओर दबाव ने भारतीय रुपये को नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। वहीं उम्मीद से बेहतर ट्रेड डेटा से मिलने वाले सपोर्ट को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। हालांकि, हाल की गिरावट की तेजी को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि रुपया आने वाले सत्र में वापसी करने की कोशिश करेगा, उम्मीद है कि 90.50 पर सपोर्ट और 91.45 पर रेजिस्टेंस वाली टेक्निकल रेंज में ट्रेड करेगा।
विजयकुमार ने बताया कि भारत का नवंबर में व्यापार घाटा अक्टूबर के 41.68 बिलियन डॉलर से घटकर 24.53 बिलियन डॉलर हो गया है, जो रुपये के लिए सकरात्मक है। इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की अधिक शिपमेंट के कारण अक्टूबर में गिरावट के बाद निर्यात में 19.37 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह छह महीने के उच्चतम स्तर 38.13 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। इसी बीच, सोने, कच्चे तेल, कोयले और कोक की आवक में गिरावट के कारण देश का आयात 1.88 प्रतिशत घटकर 62.66 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
विजयकुमार का कहना है कि आमतौर पर जब रुपया गिरता है तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये की गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर दखल देता है, लेकिन हाल ही में आरबीआई की पॉलिसी करेंसी को गिरने देने की है। भारत में कम महंगाई (नवंबर में 0.71%) सेंट्रल बैंक के इस दखल न देने का कारण है। रुपये की गिरावट से इकॉनमी को फिलहाल कोई नुकसान नहीं हो रहा है।