पिछले सत्र में पहली बार 83 रुपये के लेवल को पार करने के बाद लगातार मजबूत हो रहे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 83.08 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक आसन्न मंदी को देखते हुए निवेश जोखिम लेने से बच रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ी है और रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। ब्लूमबर्ग के अनुसार डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 82.9825 पर खुलने और 83.1212 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिलहाल 83.0925 के लेवल पर ट्रेड कर रहा है। घरेलू मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रुपया छह पैसे की गिरावट के साथ 83.06 रुपये पर कारोबार कर रहा है।
पिछले कारोबारी सेशन में एक उठा-पटक भरे सत्र के बाद घरेलू मुद्रा 83.02 प्रति डॉलर के अपने सबसे कमजोर स्तर पर बंद हुआ था। बुधवार को रुपये में एक ही कारोबारी दिन में 0.76 प्रतिशत की गिरावट दिखी थी। अक्तूबर महीने में रुपया अब तक दो प्रतिशत से अधिक गिर चुका है। इस कैलेंडर वर्ष में ही इसमें 11 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
भारत में एक डॉलर की कीमत अभी 82.32 रुपया है। लेकिन पड़ोसी देशों की हालत और भी अधिक खराब है। पाकिस्तान में एक डॉलर की कीमत 218.14 पाकिस्तानी रुपया है। इसी तरह श्रीलंका में एक डॉलर 365.11 श्रीलंकाई रुपए के बराबर है। चीन इस मामले में मजबूत स्थिति में है। 7.18 चीनी युआन रॅन्मिन्बी के बराबर एक यूएस डॉलर है। 131.74 नेपाली और 104.86 बांग्लादेशी रुपए के बराबर एक यूएस डॉलर है। सबसे खराब स्थिति म्यांमार के करंसी की है। म्यांमार में एक यूएस डॉलर की कीमत 2,095.81 बर्मी क्यात्सो है।
इसे समझने के लिए हमने अर्थशास्त्र के जानकार प्रो. प्रदीप जोशी से बात की। उन्होंने कहा, 'रुपया गिरे या डॉलर मजबूत हो। बात एक ही है। हालांकि, इसके कहने का तरीका अलग है। दोनों ही मामलों में भारतीय लोगों को नुकसान होगा।' प्रो. जोशी आगे कहते हैं, 'निर्मला सीतारमण कहना चाहती हैं कि भारतीय रुपया अन्य देशों की करंसी के मुकाबले ज्यादा कमजोर नहीं हो रहा है। आंकड़े देखें तो पिछले दिनों यूरो, ब्रिटिश पाउंड, ऑस्ट्रेलियन डॉलर, कनेडियन डॉलर, सिंगापुर डॉलर, स्विस, मलेशियन और चीनी करंसी भारत के मुकाबले ज्यादा कमजोर हुईं हैं।