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Rupee Fall: एफपीआई के इक्विटी और ऋण बाजार में बिकवाली से रुपये पर दबाव, सोने-चांदी में और तेजी का अनुमान

Sat, 13 Dec 2025 03:05 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

फेडरल रिजर्व की दर कटौती के बाद सोना साढ़े सात हफ्तों के उच्च स्तर के पास मजबूती बनाए हुए है, जबकि चांदी रिकॉर्ड स्तरों के नजदीक मुनाफावसूली के दबाव में हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रही है। इस बीच, घरेलू मुद्रा बाजार में रुपया 24 पैसे टूटकर 90.56 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। 
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रुपया - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को रुपये में डॉलर के मुकाबले बड़ी गिरावट देखने को मिली और रुपया 24 पैसे टूटकर 90.56 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया, जबकि सोने की कीमतें सात सप्ताह के ऊंचाई पर देखने को मिली।

एफपीआई के इक्विटी मार्केट में पैसे निकालने से रुपये में दबाव 

कोटक सिक्योरिटीज के मुद्रा और कमोडिटी प्रमुख अनिंद्य बनर्जी बताते हैं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के इक्विटी और डेट मार्केट दोनों में पैसे निकालने की वजह से रुपये में दबाव बना हुआ है। बढ़ती ग्लोबल यील्ड ने यूएसडी और जेपीवाई फंडेड कैरी पोजिशन को बड़े पैमाने पर कम कर दिया है, जिससे भारतीय बॉन्ड और आगे चलकर करेंसी पर और दबाव बढ़ गया है। अच्छी बात यह है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता समझौता प्रगति पर है। इसकी वजह से कई क्षेत्रों में मदद मिल रही है और निकट भविष्य में इससे जल्द ही डेप्रिसिएशन की रफ्तार धीमी हो सकती है। सभी कारकों को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि यूएस डॉलर के मुकाबले रुपया काफी हद तक रेंज बाउंड रहेगा, जिससे 89.50 से 91.00 के बीच देखा जा सकता है।

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इन कारकों का पड़ रहा असर 

जियोजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड रिसर्च एनालिस्ट एंटू इपेन थॉमस कहते हैं, रुपये के कमजोर होने की वजह भारती-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी को लेकर अनिश्चितता, विदेशी पोर्टफोलियो का भारी आउटफ्लो, डॉलर के लिए निर्यातकों की बढ़ती मांग- खासकर तेल के लिए और यूएस के भारी टैरिफ हैं, जो आयातकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे करंट अकाउंट घाटे में है। वे कहते हैं, कमजोर होते रुपये से अमेरिकी डॉलर में कीमत वाली कमोडिटी की लैंडेड कॉस्ट बढ़ जाती है। इस बीच, चांदी को मजबूत निवेश मांग, बढ़ते औद्योगिक इस्तेमाल और हाल ही में फेड रेट ब्याज दरों में कटौती से सपोर्ट मिल रहा है। चांदी की मांग अक्सर सोने के साथ बढ़ती है क्योंकि दोनों मेटल को सेफ-हेवन एसेट माना जाता है। कमजोर डॉलर के माहौल और ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट जैसे बड़े मैक्रो डायनामिक्स ने मांग बढ़ाने में मदद की है।

सोने की कीमतें बढ़ने की वजह

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने चौथाई बिंदू दर में कटौती के बाद सुरक्षित निवेश की मांग में तेजी आने से पिछले कारोबारी सत्रों में सीमित दायरे में रहने के बाद गुरुवार यानी 11 दिसंबर को सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली। वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीडीक्स) पर सोने का फरवरी 2026 वायदा अनुबंध पिछले बंद भाव से 1,29,796 रुपये की तुलना में 1,30,250 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर खुला। हाजिर सोने की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई और यह 0.20 प्रतिशत बढ़कर 4,234 डॉलर प्रति औंस हो गई। जानकारों का कहना है कि कुल मिलाकर फेडलर रिजर्व की अंतित मौद्रिक नीति बैठक के बाद ब्याज दरों में कटौती की वजह से सोने के बाजार में एक बार फिर तेजी देखी जा रही है।

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सोने की कीमत बढ़ाने का ट्रेंड बने रहे की संभावना 

कामा ज्वेलरी के एमडी कॉलिन शाह बताते हैं, इस सप्ताह सोने का बाजार मजबूत रहा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऊंचे स्तर पर बना रहा। कीमतें 4,200 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर है, जो कि सप्ताह के सबसे अधिक स्तर पर है। भारत में भी ऐसा ही ट्रेड दिखाई दे रहा है। 24 कैरेट सोना लगभग 1,30,700 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। फेडरल रिजर्व के हालिया ब्याज दरों की कटौती के बाद पश्चिमी देशों के निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश और आकर्षक हेज के तौर पर देख रहे हैं। भारत में, चल रहे शादियों के मौसम से आभूषण की मांग को बढ़ावा मिल रहा है, और यह सपोर्ट 2026 की शुरुआत तक जारी रहने की संभावना है, जिससे बिक्री अच्छी बनी रहेगी। जब तक ब्याज दरों या करेंसी की चाल से जुड़े अचानक झटके नहीं आते, सोने के ऊपर जाने का ट्रेंड बने रहने की संभावना है।

चांदी पहुंची 2 लाख रुपये के करीब  

भारतीय सर्राफा बाजार में बीते दिन चांदी ने पिछले रिकॉर्ड को तोड़ते हुए जोरदार तेजी दिखाई। यह एक दिन में ही चांदी 10,600 रुपये उछल कर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई। एमसीएक्स पर चांदी ने 1,99,220 रुपये का नया ऑल टाइम हाई बनाया, जिसने निवेशकों को चौका दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 64.50 डॉलर (लगभग 5,800 रुपये) प्रति औंस के पार चली गई है।

चांदी की कीमतें बढ़ने की वजह, आगे भी तेजी की संभावना

जानकारों का कहना हैकि वैश्विक सप्लाई की कमी और डॉलर में उतार-चढ़ाव ने कीमतों को बढ़ाया है। इस तेजी ने मंदी करने वाले निवेशकों को भी संभलने का मौका नहीं दिया। विशेषज्ञों के अनुसार चांदी में यह तेजी केवल सट्टेबाजी नहीं बल्कि कई मजबूत कारणों की वजह से दिखाई दे रही है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल और 5जी तकनीक में चांदी के इस्तेमाल की वजह से औद्योगिक मांग 2025 में अत्यधिक बढ़ी है। जबकि सप्लाई सीमित है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी कई वर्षों से उच्च स्तर पर ट्रेड कर रही है, इसका सीध असर भारतीय बाजार में दिखाई दे रहा है। वहीं रुपये की कमजोर होती स्थिति ने भी कीमती धातुओं की कीमतों को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है।

 विशेषज्ञों के कहना है, कम कीमत में, जिन्होंने इसमें निवेश किया उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ी है, क्योंकि एक दिन इतना उछाल कम ही देखने को मिलता है। वहीं आभूषणों की खरीदारी करने वालों के लिए यह समय नहीं है, क्योंकि चांदी अब आम खरीदारों की पहुंच से दूर होती जा रही है। मौजूदा तेजी को देखते हुए और औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती मांग की वजह से चांदी 2 लाख रुपये के स्तर को पार कर सकती है, क्योंकि तकनीक चार्ट में आगे भी तेजी की संभावना बनी हुई है।

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