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Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला जारी, नए सर्वकालिक निचले स्तर 88.47 पर पहुंचा

Thu, 11 Sep 2025 03:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। गुरुवार को भारतीय करेंसी डॉलर के मुकाबले अपने नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गई। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के बढ़ते दबाव के कारण है। आइए जानते हैं फॉरेक्स मार्केट में क्या चल रहा है।
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रुपया बनाम डॉलर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 36 पैसे टूटकर 88.47 (अनंतिम) के सर्वकालिक निम्न स्तर पर पहुंच गया।

क्यों लगातार कमजोर होता जा रहा रुपया?

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के बढ़ते दबाव के कारण है। रुपये में गिरावट इस बात के संकेत हैं कि पिछले महीने से भारत पर लागू हुए अमेरिकी टैरिफ भारत में निवेशकों के विश्वास पर असर डाल रहे हैं। यही कारण है कि एशियाई समकक्षों के बीच रुपया सबसे कमजोर स्थिति में है। विदेशी निवेशकों ने इस साल अब तक भारतीय ऋण और शेयर बाजारों से 11.7 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की है।

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पिछले शुक्रवार को रुपया 88.36 के स्तर तक चला गया था। वाशिंगटन के भारी टैरिफ ने भारत के विकास और व्यापार परिदृश्य को नुकसान पहुंचाया है और मुद्रा विनिमय की राह को धुंधला कर दिया है। इस प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार ने जीएसटी की दरों को बड़े पैमाने पर कम करने का एलान किया है। हालांकि, इस बीच भारत और अमेरिका व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर बातचीत करने भी विचार कर रहे हैं।

निर्यातकों को ऑर्डर से जुड़ी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा

फिलहाल, निर्यातकों को ऑर्डर प्रवाह को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, आयातकों को अधिक आक्रामक तरीके से हेजिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इससे मुद्रा बाजार में मांग-आपूर्ति संतुलन बिगड़ रहा है। रुपये में गिरावट की गति को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बार-बार हस्तक्षेप किया है। बाजार सहभागियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक बाजार में सक्रिय रहा है।

माना जा रहा है कि आरबीआई अस्थिरता को कम करने और बड़े उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए डॉलर बेच रहा है। बैंकरों का कहना है कि हस्तक्षेप का उद्देश्य किसी विशेष स्तर को बनाए रखना नहीं है, बल्कि गिरावट को स्थिर रखकर कंपनियों और निवेशकों की बेचैनी दूर करना है।

रुपये में गिरावट पर जानकारों की क्या राय?

विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि महंगाई के आंकड़ों से पहले डॉलर में सुधार और विदेशी पूंजी निकासी ने निवेशकों की धारणा को और प्रभावित किया। पिछले कुछ सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी आई है, जिससे रुपये पर और दबाव पड़ा। व्यापारियों ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत-अमेरिका व्यापार संधि के बारे में सकारात्मक संकेत दिए जाने के बाद रुपये में मामूली सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन डॉलर की मांग और वैश्विक कारणों से रुपये में कमजोरी बनी हुई है।

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अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 88.11 पर खुला और दिन के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.47 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गिर गया। कारोबार के अंत में रुपया 88.47 (अनंतिम) के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। यह पिछले दिन की क्लोजिंग के मुकाबले 36 की बड़ी गिरावट है। 

बुधवार को रुपया अपने रिकॉर्ड निम्न स्तर से थोड़ा संभला और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 पैसे की बढ़त के साथ 88.11 पर बंद हुआ था। 5 सितंबर को रुपया 88.38 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, लेकिन अंत में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.09 रुपये पर बंद होने से पहले सभी नुकसानों को कम कर लिया। 2 सितंबर को डॉलर के मुकाबले रुपया 88.15 के अपने सर्वकालिक निम्नतम बंद स्तर पर बंद हुआ था।

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निवेशकों की नजर अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों पर

एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष रिसर्च एनालिस्ट, कमोडिटी व करेंसी जतिन त्रिवेदी का कहना है विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के मिले-जुले निवेश और 97 करीब मजबूत डॉलर इंडेक्स के दबाव में बने रहने की वजह से रुपये में 0.35 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई और यह 88.46 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका उपभोक्ता मूल्य सूचकांक(सीपीआई) के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित है। डॉलर और बदले में रुपये के उतार-चढ़ाव ला सकता है। कच्चे तेल की कीमतें भी अस्थिर रही हैं और बाजार में भी कमजोर धारणा देखी गई है। यदि अमेरिका और भारत व्यापार समझौते में अपडेट होता है तो रुपये में सुधार आ सकता है। फिलहाल, रुपया 87.85-88.10 के स्तर पर समर्थन और 88.55-88.70 के स्तर पर प्रतिरोध के बीच कारोबार करता हुआ देखा जा सकता है।
 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष नंदीश शाह कहते हैं, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 88.46 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण आयातकों की ओर से मजबूत मांग, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में तेजी और बढ़ते व्यापार घाटे की चिंताओं ने रुपये को निचले स्तर पर पहुंचाया है।

यस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार रुपये की कमजोरी टैरिफ ड्रिवन सेंटिमेंट हैं। जुलाई में रियल एफेक्ट एक्सजेंस रेट 100.7 रहा जो लंबे समय के औसत 103.2 से नीचे है। इसका मतलब यह है कि रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है, बल्कि अंडवैल्यूएशन के करीब है। फिलहाल रुपये की गिरावट को ओवरसोल्ड जोन में धकेल दिया है, जिससे रिबाउंड होने की संभावना बढ़ जाती है। रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक स्पॉट और एनडीएफ मार्केट में लगातार हस्तक्षेप कर वोलेटिलिटी को कंट्रोल कर रहा है। जुलाई 2025 में सीपीआई केवल 1.5 प्रतिशत रही है वित्त वर्ष 26 में औसत 3 प्रतिशत के नीचे रहने का अनुमान है। इसकी वजह से वित्त वर्ष 26 में 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती संभव हो सकती है, जबकि रियल इंटरेस्ट रेट में 1-1.25 प्रतिशत सकारात्मक रहेगा, जिससे करेंसी को सपोर्ट मिल सकता है।
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