निवेशकों की नजर अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों पर
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष रिसर्च एनालिस्ट, कमोडिटी व करेंसी जतिन त्रिवेदी का कहना है विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के मिले-जुले निवेश और 97 करीब मजबूत डॉलर इंडेक्स के दबाव में बने रहने की वजह से रुपये में 0.35 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई और यह 88.46 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका उपभोक्ता मूल्य सूचकांक(सीपीआई) के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित है। डॉलर और बदले में रुपये के उतार-चढ़ाव ला सकता है। कच्चे तेल की कीमतें भी अस्थिर रही हैं और बाजार में भी कमजोर धारणा देखी गई है। यदि अमेरिका और भारत व्यापार समझौते में अपडेट होता है तो रुपये में सुधार आ सकता है। फिलहाल, रुपया 87.85-88.10 के स्तर पर समर्थन और 88.55-88.70 के स्तर पर प्रतिरोध के बीच कारोबार करता हुआ देखा जा सकता है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष नंदीश शाह कहते हैं, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 88.46 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट का मुख्य कारण आयातकों की ओर से मजबूत मांग, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में तेजी और बढ़ते व्यापार घाटे की चिंताओं ने रुपये को निचले स्तर पर पहुंचाया है।
यस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार रुपये की कमजोरी टैरिफ ड्रिवन सेंटिमेंट हैं। जुलाई में रियल एफेक्ट एक्सजेंस रेट 100.7 रहा जो लंबे समय के औसत 103.2 से नीचे है। इसका मतलब यह है कि रुपया ओवरवैल्यूड नहीं है, बल्कि अंडवैल्यूएशन के करीब है। फिलहाल रुपये की गिरावट को ओवरसोल्ड जोन में धकेल दिया है, जिससे रिबाउंड होने की संभावना बढ़ जाती है। रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक स्पॉट और एनडीएफ मार्केट में लगातार हस्तक्षेप कर वोलेटिलिटी को कंट्रोल कर रहा है। जुलाई 2025 में सीपीआई केवल 1.5 प्रतिशत रही है वित्त वर्ष 26 में औसत 3 प्रतिशत के नीचे रहने का अनुमान है। इसकी वजह से वित्त वर्ष 26 में 25 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती संभव हो सकती है, जबकि रियल इंटरेस्ट रेट में 1-1.25 प्रतिशत सकारात्मक रहेगा, जिससे करेंसी को सपोर्ट मिल सकता है।