हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपये अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इसकी प्रमुख वजहों में एफपीआई की भारी बिकवाली, कंपनियों में ऊंचे वैल्यूएशन के चलते हिस्सेदारी बिक्री, कच्चे तेल और सोने की बढ़ी खरीदारी, कॉरपोरेट व केंद्र सरकार की चुकौती संबंधी देनदारियां शामिल हैं।
भारतीय रुपया सोमवार को विदेशी मुद्रा बाजार में बड़ी गिरावट के साथ अपने नए सर्वकालिक निचले स्तर पर फिसल गया। शुरुआती कारोबार में रुपये में दबाव बढ़ा और यह डॉलर के मुकाबले 34 पैसे गिरकर 89.79 के रिकॉर्ड लो पर आया।
विज्ञापन
शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नौ पैसे गिरकर 89.45 पर बंद हुआ। वहीं 21 नवंबर को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 98 पैसे गिरकर 89.66 के अपने सर्वकालिक निम्नतम स्तर पर बंद हुआ।
रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसकी प्रमुख वजहों में एफपीआई की भारी बिकवाली, कंपनियों में ऊंचे वैल्यूएशन के चलते हिस्सेदारी बिक्री, कच्चे तेल और सोने की बढ़ी खरीदारी, कॉरपोरेट व केंद्र सरकार की चुकौती संबंधी देनदारियां शामिल हैं।
विज्ञापन
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि इन सभी कारणों ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ व्यापार तनाव अभी बना हुआ है। हालांकि वर्ष के अंत तक किसी तरह के समाधान की उम्मीद की जा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आशावाद
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 28 नवंबर को कहा था कि भारत इस वर्ष के भीतर ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर पहुंचने को लेकर आशावादी है, जिससे शुल्क संबंधी मुद्दों का समाधान होगा और भारतीय निर्यातकों को लाभ मिलेगा।
भारत और अमेरिका लंबे समय से व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन 2025 के अंत तक अपेक्षित पहले चरण की प्रगति में बाधा डाली है ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए शुल्कों ने। उधर, वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स 0.04% बढ़कर 99.50 पर पहुंच गया, जिससे उभरती बाजार मुद्राओं पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।