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पांच साल में 26 सरकारी बैंकों की 3,427 शाखाओं पर गिरी गाज

Mon, 04 Nov 2019 05:57 AM IST
देव कश्यप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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एसबीआई
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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय या शाखाबंदी की वजह से पिछले पांच वर्षों में 26 सरकारी बैंकों की कुल 3,427 शाखाओं के मूल अस्तित्व पर असर हुआ है। इनमें से 75 फीसदी शाखाएं एसबीआई की हैं। इस दौरान एसबीआई के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का इसमें विलय हुआ था।

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सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब देश के 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। रिजर्व बैंक ने आरटीआई के जवाब में बताया कि देश के 26 सरकारी बैंकों की वित्त वर्ष 2014-15 में 90 शाखाएं, 2015-16 में 126 शाखाएं, 2016-17 में 253 शाखाएं, 2017-18 में 2,083 शाखाएं और 2018-19 में 875 शाखाएं या तो बंद कर दी गईं या इनका दूसरी बैंक शाखाओं में विलय कर दिया गया है।

इस दौरान सबसे ज्यादा एसबीआई की 2,568 बैंक शाखाओं पर असर हुआ है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने कानून का हवाला देते हुए इन शाखाओं को बंद किए जाने की मूल वजह बताने से इनकार कर दिया।

बंद हो सकती हैं सात हजार शाखाएं

सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारी संगठन अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम का कहना है कि अगर सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाती है, तो आने वाले समय में कम से कम 7,000 शाखाएं और प्रभावित हो सकती हैं।

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इसमें से अधिकतर महानगरों या शहरी क्षेत्रों की होंगी। दूसरी ओर, अर्थशास्त्री जयंतीलाल भंडारी का कहना है कि सरकारी बैंकों का विलय समय की मांग है। छोटे बैंकों के विलय से बड़े बैंक बनेंगे, तो सरकारी खजाने को लाभ होगा। इन बैंकों की मजबूत स्थिति के कारण ये लोगों को ज्यादा कर्ज बांट सकेंगे जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

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